चंडीगढ़, 22 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Haryana AAS WhatsApp Chatbot: हरियाणा में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और बाबूशाही की लेटलतीफी से जनता को परमानेंट मुक्ति दिलाने के लिए राज्य सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत कर दिया है। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टी.सी. गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) ने चंडीगढ़ मुख्यालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इस खास मौके पर नागरिकों की सहूलियत के लिए दो बड़े डिजिटल टूल्स ‘एएएस व्हाट्सएप चैटबॉट’ (AAS WhatsApp Chatbot) और ‘एएएस मोबाइल एप्लीकेशन’ का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। इस दौरान राइट टू सर्विस कमीशन की सचिव डॉ. सरिता मलिक और अंडर सेक्रेटरी-कम-रजिस्ट्रार श्री सुबे खान समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
“सेवाएं आपकी उंगलियों पर” व्हाट्सएप नंबर 6239466937 जारी
मुख्य आयुक्त टी.सी. गुप्ता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आयोग “पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध सेवा” के मूल सिद्धांत पर काम कर रहा है। नए व्हाट्सएप चैटबॉट और मोबाइल ऐप के आ जाने से अब आम जनता को अपील दायर करने, अपनी फाइल का स्टेटस जानने या किसी भी सरकारी सेवा की समयसीमा पता करने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर नहीं जाना पड़ेगा। नागरिक अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप नंबर 6239466937 पर एक साधारण संदेश भेजकर चौबीसों घंटे इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यह कदम ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
ऑटो अपील सिस्टम (AAS) बना देश का रोल मॉडल
हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 के तहत वर्तमान में 56 विभागों की 802 जरूरी सेवाएं समयबद्ध दायरे में आती हैं। इसमें राशन कार्ड, विवाह पंजीकरण, बिजली-पानी के कनेक्शन से लेकर रिहायशी और जाति प्रमाणपत्र जैसे काम शामिल हैं। वर्ष 2021 में शुरू किया गया ऑटो अपील सिस्टम (AAS) इस पूरे ढांचे का सबसे क्रांतिकारी सुधार है। अगर किसी नागरिक का काम तय दिनों में पूरा नहीं होता, तो कंप्यूटर सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के खुद-ब-खुद (Automatically) उच्च अधिकारियों के पास अपील दर्ज कर देता है। देरी होने पर अब नागरिक को सिस्टम के पीछे नहीं भागना पड़ता, बल्कि सरकारी सिस्टम खुद नागरिक के हक में सक्रिय हो जाता है।
कागजी काम पूरी तरह बंद
आयोग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 के सालाना आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान सरल (SARAL) प्लेटफॉर्म पर विभिन्न सेवाओं के लिए रिकॉर्ड 2.06 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से लगभग 1.95 करोड़ आवेदनों (94.71 प्रतिशत) का निपटारा अधिकारियों द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर ही कर दिया गया। केवल 9.63 लाख आवेदनों में देरी दर्ज की गई, जबकि 1.25 लाख आवेदन 31 मार्च, 2026 तक पेंडिंग थे। इसके अलावा, एएएस (AAS) पर अब तक आईं 28.5 लाख से अधिक अपीलों में से 98 फीसदी से ज्यादा मामलों का निपटान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों पक्षों को सुनकर किया जा चुका है। पूरा आयोग ई-ऑफिस प्रणाली के तहत पेपरलेस तरीके से काम कर रहा है।
‘डी-रेगुलेशन इनिशिएटिव’ में हरियाणा नंबर वन
आयोग ने आम जनता और उद्योगपतियों की सहूलियत के लिए बिजली बिलों में पारदर्शिता, प्रॉपर्टी आईडी (Property ID) आवेदनों में अनिश्चित रिजेक्शन को रोकने और उच्च शिक्षा में डिग्री वितरण की ट्रैकिंग जैसे कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों के सुझाव भी सरकार को दिए हैं। मुख्य आयुक्त ने बताया कि यह ऑटोमैटिक सिस्टम विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों, बुजुर्गों और श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी राहत बना है। हरियाणा का यह अनूठा डिजिटल मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रहा है। भारत सरकार की ‘डी-रेगुलेशन इनिशिएटिव’ (De-regulation Initiative) में इसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है, और देश के कई दूसरे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अब हरियाणा के इस मॉडल को अपने यहां लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।
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