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Haryana Roadways: 6 साल से नहीं बढ़ा किराया, ₹1000 करोड़ के घाटे में हरियाणा रोडवेज

On: May 21, 2026 12:33 PM
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Haryana Roadways: 6 साल से नहीं बढ़ा किराया, ₹1000 करोड़ के घाटे में हरियाणा रोडवेज
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चंडीगढ़, 21 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Haryana Roadways Loss: सुबह की पहली किरण के साथ जब हरियाणा रोडवेज की सारथी बसें गांवों से शहरों की तरफ दौड़ना शुरू करती हैं, तो वे सिर्फ सवारियां नहीं ढोतीं, बल्कि सूबे की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोजगार की उम्मीदों को रफ्तार देती हैं। लेकिन आज इस जीवनरेखा के पहिए खुद कर्ज और घाटे के दलदल में धंसते जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दौर में बेड़े में नई बसें शामिल करके रूट तो बढ़ा दिए गए, लेकिन समय पर व्यावहारिक फैसले न लेने का नतीजा यह हुआ कि आज रोडवेज अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है।

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से निजी वाहनों को छोड़कर सरकारी परिवहन अपनाने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा में इस सरकारी तंत्र को मजबूत करने की फाइलें धूल फांक रही हैं। सबसे बड़ी चोट लगी है Haryana Roadways के बस किराए पर, जिसमें साल 2020 के बाद से पिछले छह वर्षों में एक पैसे का भी संशोधन नहीं किया गया। परिवहन जगत के जानकारों का कहना है कि आज की महंगाई और बढ़ती लागत के हिसाब से साधारण बस का किराया कम से कम ₹2 प्रति किलोमीटर होना चाहिए, लेकिन हरियाणा के लोग आज भी करीब ₹1 प्रति किलोमीटर के पुराने रेट पर ही सफर कर रहे हैं।

₹62 का डीजल अब ₹91.50 पार, पर किराया जस का तस

इस वित्तीय घाटे के गणित को समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। साल 2020 में जब मौजूदा किराया तय हुआ था, तब हरियाणा में डीजल करीब ₹62 प्रति लीटर बिक रहा था। आज साल 2026 में यह आंकड़ा ₹91.50 प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुका है। सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि बसों के टायर, स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव का खर्च और कर्मचारियों के वेतन-पेंशन में भारी बढ़ोतरी हुई है। लागत आसमान छू रही है और कमाई का मीटर वहीं थमा हुआ है।

रोडवेज की वित्तीय स्थिति (प्रति किलोमीटर) राशि (रुपये में)

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बस संचालन की वास्तविक लागत ₹73
बस से होने वाली वास्तविक आमदनी ₹39
हर किलोमीटर पर सीधा नुकसान (घाटा) ₹34

अगर आंकड़ों के इस सफर को देखें तो साल 2014-15 में परिवहन विभाग का कुल घाटा ₹447 करोड़ था। साल 2021-22 में यह बढ़कर ₹931 करोड़ हुआ और साल 2022-23 में ₹1000 करोड़ के डरावने आंकड़े को पार कर गया। इसके बावजूद सरकार किराया बढ़ाने का कड़ा फैसला लेने से बचती रही।

42 श्रेणियों को मुफ्त सफर का वीआईपी ट्रीटमेंट

Haryana Roadways की वित्तीय कमर तोड़ने में सोशल इंजीनियरिंग और मुफ्त सुविधाओं का भी बड़ा हाथ रहा है। पूर्व परिवहन मंत्री खुद मान चुके हैं कि विभाग इस समय 42 अलग-अलग श्रेणियों के यात्रियों को मुफ्त या बेहद रियायती दरों पर सफर करा रहा है। सामाजिक न्याय, पुलिस और जनसंपर्क जैसे विभागों की ओर से दी जाने वाली इन सुविधाओं का पूरा बोझ अकेले रोडवेज के खाते में डाल दिया जाता है। हालांकि, समय-समय पर संबंधित विभागों से इस खर्च की प्रतिपूर्ति (बजट रिकवरी) के प्रस्ताव बनते हैं, लेकिन सरकारी फाइलों के फेर में वास्तविक खर्च और मिलने वाली रकम के बीच का अंतर कभी पट नहीं पाता।

परिवहन विभाग के अफसरों ने कई बार किराया बढ़ाने और वित्तीय सुधारों का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार करके मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) भेजा। लेकिन लोकलुभावन राजनीति और चुनावी नफे-नुकसान के चलते इन प्रस्तावों को हर बार ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सड़क परिवहन मंत्रालय की एक राष्ट्रीय रिपोर्ट भी आगाह कर चुकी है कि देश के 90 फीसदी राज्य परिवहन निगम इसी वजह से वेंटिलेटर पर हैं क्योंकि वे लागत के अनुपात में किराए की समीक्षा नहीं करते।

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अब नायब सरकार से बची है आस

इस आर्थिक संकट का सीधा और सबसे क्रूर असर हरियाणा के ग्रामीण इलाकों पर पड़ने लगा है। जब डिपो के पास डीजल और स्पेयर पार्ट्स के पैसे नहीं होते, तो सबसे पहले गांवों के रूट काटे जाते हैं। रोजाना कॉलेज जाने वाली छात्राएं, अनाज मंडी जाने वाले किसान, कारखानों के मजदूर और छोटे कर्मचारी बसों के इंतजार में बस अड्डों पर घंटों खड़े रहते हैं। कई रूटों पर बसें सीमित कर दी गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

अब प्रदेश के युवाओं, किसानों और खुद Haryana Roadways कर्मचारियों की नजरें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर टिकी हैं। परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नायब सरकार ने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आधार पर तुरंत किराया पुनरीक्षण और नीतिगत सुधार नहीं किए, तो हरियाणा रोडवेज को इस वित्तीय खाई से बाहर निकालना नामुमकिन हो जाएगा। देखना यह है कि सरकार इस संकट पर कब तक मौन रहती है।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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