HPSC Irregularities: Abhay Chautala demands, government should immediately dismiss the chairman: HPSC धांधली (HPSC Irregularities) को लेकर हरियाणा में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। इनैलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (Haryana Public Service Commission) के चेयरमैन आलोक वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर भूगोल की परीक्षा की आंसर-की (Answer Key) में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है। आइए, इस विवाद की वजह और चौटाला के आरोपों को समझते हैं।
आंसर-की में गड़बड़ी और साजिश के आरोप HPSC Irregularities
अभय चौटाला ने दावा किया कि HPSC धांधली (HPSC Irregularities) के पीछे चेयरमैन आलोक वर्मा की साजिश है। उन्होंने कहा कि भूगोल के पेपर में 32 सवाल बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (Bihar PSC) से लिए गए। कई पेपरों की सील टूटी हुई थी, और आंसर-की में 6 सवालों के जवाब बदल दिए गए।
कुछ सवाल तो हटा ही दिए गए। चौटाला का आरोप है कि यह सब बिहार और यूपी के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की साजिश (Conspiracy) का हिस्सा है।
चौटाला ने कहा कि यह सब भाजपा सरकार (BJP Government) की सहमति से हो रहा है। उन्होंने चेयरमैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की। यह विवाद हरियाणा के युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, जो निष्पक्ष भर्ती (Fair Recruitment) की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
भर्ती में पैसे का खेल?
चौटाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की “बिना पर्ची-बिना खर्ची” की बात खोखली है। उनके मुताबिक, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती (Assistant Professor Recruitment) के लिए योग्य उम्मीदवारों से लाखों रुपये लिए जा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता और एक्टिविस्ट भी HPSC की गड़बड़ियों को उजागर कर रहे हैं, लेकिन सरकार और आयोग पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा।
हरियाणा के युवा इस धांधली का शिकार हो रहे हैं। चौटाला का कहना है कि योग्य उम्मीदवारों (Eligible Candidates) को मौका नहीं मिल रहा। यह स्थिति न केवल भ्रष्टाचार (Corruption) को बढ़ावा दे रही है, बल्कि युवाओं का भरोसा भी तोड़ रही है।
निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग
HPSC धांधली (HPSC Irregularities) का यह मामला निष्पक्षता और पारदर्शिता (Transparency) पर सवाल उठाता है। अभय चौटाला ने सरकार से मांग की है कि चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त (Dismissal) किया जाए। उन्होंने इस मामले की गहन जांच (Thorough Investigation) की भी मांग की है।
यह विवाद युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा है। समाज को भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की जरूरत है। सरकार और HPSC को चाहिए कि वे इस मामले में त्वरित कार्रवाई करें। निष्पक्ष जांच और सख्त कदम ही युवाओं का भरोसा बहाल कर सकते हैं।













