कुरुक्षेत्र (International Gita Mahotsav): 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर हरियाणा पैवेलियन सजकर तैयार हो रहा है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, प्रदेश सरकार के आर्ट एंड कल्चर विभाग तथा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में बन रहे इस पैवेलियन में हरियाणवी संस्कृति के साथ-साथ नवाचार, उद्यमिता और स्वदेशी स्टार्टअप की झलक देखने को मिलेगी। पवेलियन में करीब 70 स्टाॅल लगाई जाएंगी, जिन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में पैवेलियन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसकी रौनक दूर से ही मन मोह रही है। पैवेलियन में आने वाले देश-विदेश के पर्यटक हरियाणवी रसोई का असली स्वाद चख सकेंगे।
International Gita Mahotsav: स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाएंगे
हरियाणा की पहचान दूध-दही का खाना को साकार करते हुए देसी घी का चूरमा, गुड़ का हलवा, खीर, देसी घी की जलेबी, लस्सी, टिक्की, दही-भल्ले, ड्राई फ्रूट लड्डू, गुलाब जामुन, राजमा-चावल, गोलगप्पे और तिल्ला कुल्फी जैसे स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाएंगे।
विशेष सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जा रहे हैं। एक सेल्फी प्वाइंट पर भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप प्रदर्शित होगा और दूसरा हरियाणवी लोक कला और ग्रामीण संस्कृति की झलक पेश करेगा।
लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि हरियाणवी भोजन की प्रसिद्धि पूरे विश्व में है और यह पैवेलियन उसकी असली छवि को सामने लाएगा।
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की टीम इस बार पैवेलियन में पहली बार पॉडकास्ट शुरू करने जा रही है। मुख्य अतिथियों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के साक्षात्कार रिकॉर्ड किए जाएंगे और उन्हें विश्वविद्यालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा।
स्वदेशी स्टार्टअप और नवाचार की प्रदर्शनी
हरियाणा पैवेलियन के इंचार्ज व युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि पैवेलियन में आत्मनिर्भर और विकसित भारत की थीम पर नवाचार एवं उद्यमिता की प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा विद्यार्थियों के स्वदेशी स्टार्टअप और नवाचार आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही पैवेलियन में झोपड़ी और प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिससे पर्यटकों को हरियाणा की गौरवशाली परंपरा और संस्कृति के दर्शन होंगे।












