Mandiali Nagari dance, कुरुक्षेत्र: कभी राजाओं के दरबार में किया जाने वाला हिमाचल प्रदेश के मंडी का महिला प्रधान मंडियाली नागरी नृत्य अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में खास आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
जहां मंडी जनपद से मांडव्य कला मंच के कलाकारों की आई 16 सदस्यीय टीम इस प्राचीन लोक नृत्य को जीवंत करने में जुटी है, वहीं गीता महोत्सव में इसे देख पर्यटक गदगद हो रहे हैं। इस नृत्य के साथ ही हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति के अद्भुत रंग भी पवित्र ब्रह्मसरोवर के तट पर देखने को मिल रहे हैं।
गीता महोत्सव में अनोखी अनुभूति
मंगलवार को भी महोत्सव में ढोल की थाप, हिमाचली धुनों की मधुरता और पारंपरिक वेशभूषा ने पूरे वातावरण को लोक-रस की अनोखी अनुभूति से भर दिया।
जैसे ही कलाकार ब्रह्मसरोवर के घाटों पर उतरे, उत्साह और ऊर्जा से भरे समूह नृत्यों ने दर्शकों को अपनी ओर खींच लिया। हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज और उत्साह भरी सराहना ने यह साबित कर दिया कि हिमाचली लोक-नृत्य अपनी विशिष्ट पहचान और जीवंतता के कारण हर दिल में जगह बना लेते हैं।
लुड्डी नृत्य ने अपनी तेज लय, हाथों की लयबद्ध हरकतों और सामूहिक तालमेल से दर्शकों को रोमांचित किया। कलाकार भानु ने बताया कि यह नृत्य हिमाचल की उत्सव परंपरा का प्रतीक है, जो फसल कटाई, जीत और खुशियों के मौके पर किया जाता है।
इसके बाद प्रस्तुत किया गया मंडियाली नृत्य जिसने अपनी मधुर लय और गोलाकार समूह संरचना से सभी का मन मोह लिया। कलाकार प्रिया ने बताया कि महिलाएं यह नृत्य करती हैं, जो लोकगीतों, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक संदेशों से भरपूर होता है।
उल्लास का प्रतीक है Mandiali Nagari dance
कलाकारों की अगुवाई कर रहे कुलदीप गुलेरिया बताते हैं कि नागरी नृत्य मंडी क्षेत्र की प्राचीन परंपरा से जुड़ा है। यह नृत्य ऊर्जा, वीरता और पर्व-उत्सव के उल्लास का प्रतीक है। पहले यह राजाओं के दरबार में ही किया जाता था।
वर्तमान में यह हिमाचल प्रदेश के प्रदेश स्तरीय शिव रात्रि मेले का सबसे खास आकर्षण होता है। यही मंडी का महिला प्रधान नृत्य है। इसमें संस्कार गीत, श्रीकृष्ण की लीलाओं के वर्णन के गीत भी शामिल होते हैं।
लोक-परंपराओं को नई पहचान देने का प्रयास
दल प्रमुख ने बताया कि उनकी कोशिश है कि हिमाचल की लोक-परंपराओं को राष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान मिले। गीता महोत्सव जैसे भव्य आयोजन उन्हें हजारों लोगों के सामने अपनी धरोहर प्रस्तुत करने का अवसर दे रहे हैं। कलाकार प्रस्तुति के माध्यम से न केवल मनोरंजन बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रसार को भी नई दिशा दे रहे हैं।












