Noida News Electric car owner fined 25000 rupees for charging ev by domestic Meter know details: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की सरकारी मुहिम के बीच, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नियमों की कमी ने कई EV मालिकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक इलेक्ट्रिक कार मालिक पर अपनी कार चार्ज करने के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया गया। यह घटना नोएडा के सेक्टर 76 में स्थित आम्रपाली प्रिंसली एस्टेट सोसायटी की है, जिसने EV मालिकों के सामने आने वाली समस्याओं को उजागर किया है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारणों को समझते हैं।
Noida News: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, लेकिन नियमों का अभाव
सरकार एक ओर इलेक्ट्रिक वाहनों को पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प बताकर उनकी खरीद पर सब्सिडी और प्रोत्साहन दे रही है, वहीं दूसरी ओर चार्जिंग से जुड़े नियम और बुनियादी ढांचे की कमी EV मालिकों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। अगर आप अपने घर में रहते हैं, तो EV चार्जिंग में ज्यादा दिक्कत नहीं होती, लेकिन अपार्टमेंट या सोसायटी में रहने वाले लोगों के लिए यह एक जटिल समस्या है। कई सोसायटियों में EV चार्जिंग को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, और नोएडा का यह ताजा मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है।
नोएडा में क्या हुआ?
नोएडा के सेक्टर 76 में आम्रपाली प्रिंसली एस्टेट सोसायटी में रहने वाले एक महिंद्रा XUV400 EV मालिक ने अपनी कार को घरेलू बिजली मीटर से चार्ज किया, जिसके लिए उन पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया गया। पीड़ित मालिक ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि सोसायटी की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने उन्हें तीन दिनों के भीतर जुर्माना भरने का आदेश दिया।
@dmgbnagar @CeoNoida @nitin_gadkari @OfficeOfNG @Abhijeet_Sinhaa we are being constantly harassed and penalised by the rwa/aoa in all possible ways. We really need help from the authorities.someone please help https://t.co/lV1JaEZoZt pic.twitter.com/ARxtxs8G3f
— TDB (@thedeshbhakt56) April 18, 2025
मालिक का दावा है कि RWA ने कुछ चुनिंदा थर्ड-पार्टी चार्जिंग वेंडर्स के साथ समझौता किया है और सभी EV मालिकों पर इन टर्मिनलों का इस्तेमाल करने का दबाव बनाया जा रहा है। इन टर्मिनलों से चार्जिंग करने की लागत घरेलू बिजली से कहीं ज्यादा है, जो EV की कम रनिंग कॉस्ट के फायदे को खत्म कर देता है।
थर्ड-पार्टी चार्जिंग: महंगा और अव्यवहारिक
EV मालिकों के लिए थर्ड-पार्टी चार्जिंग स्टेशनों का इस्तेमाल न केवल महंगा है, बल्कि कई बार अव्यवहारिक भी साबित होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी कम रनिंग कॉस्ट है, लेकिन थर्ड-पार्टी चार्जिंग इस फायदे को कम कर देती है। पीड़ित मालिक ने यह भी खुलासा किया कि उनकी कार को सोसायटी की पार्किंग में चार्ज करने के दौरान कई बार चार्जर के तार काट दिए गए। इसके अलावा, नोएडा में पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की कमी और उनकी खराब स्थिति भी EV मालिकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कई जगह चार्जर काम नहीं करते, और हर जगह पब्लिक चार्जर उपलब्ध भी नहीं हैं।
RWA का दबाव और मनमानी
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोसायटी की RWA को EV मालिकों पर इस तरह के नियम थोपने और जुर्माना लगाने का अधिकार है? मालिक का कहना है कि RWA ने उनकी सहमति के बिना थर्ड-पार्टी वेंडर्स के साथ करार किया और सभी निवासियों को इनका इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह न केवल EV मालिकों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाता है, बल्कि उनकी स्वतंत्रता को भी सीमित करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार और स्थानीय प्रशासन को EV चार्जिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि सोसायटियों में ऐसी मनमानी पर रोक लग सके?
EV मालिकों के लिए क्या है रास्ता?
यह मामला उन तमाम EV मालिकों के लिए एक चेतावनी है, जो अपार्टमेंट या सोसायटियों में रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ सोसायटियों के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए। नोएडा जैसे शहरों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जरूरत है। साथ ही, RWA को EV मालिकों के साथ सहयोग करने और उचित समाधान निकालने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
एक कदम आगे, दो कदम पीछे
इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन चार्जिंग से जुड़ी ऐसी घटनाएं EV क्रांति को पीछे धकेल सकती हैं। सरकार को चाहिए कि वह न केवल EV खरीदने के लिए प्रोत्साहन दे, बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नियमों को भी सरल बनाए। नोएडा के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बिना मजबूत नीतियों और सहयोग के, EV का भविष्य अधर में लटक सकता है।













