Operation Sindoor Martyr Kaustubh Ganbote’s wife and son said, ‘We got justice, the army gave us pride’: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक बार फिर अपनी अटल इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना ने 6-7 मई 2025 की मध्यरात्रि को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी, जिसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। इस हमले में पुणे के कौस्तुभ गणबोटे भी शहीद हुए थे। उनकी पत्नी संगीता गणबोटे और बेटे कुणाल गणबोटे ने ऑपरेशन सिंदूर की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्रवाई शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है। आइए, उनकी भावनाओं और इस ऑपरेशन की कहानी को करीब से जानें।
Operation Sindoor: शहीद कौस्तुभ गणबोटे के बेटे का गर्व
पहलगाम हमले में पुणे के कौस्तुभ गणबोटे की जान चली गई थी, जिनके परिवार पर इस त्रासदी ने गहरी चोट पहुंचाई। उनके बेटे कुणाल गणबोटे ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हम सभी इस तरह की कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे। भारत सरकार से हमें यही उम्मीद थी। ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ है, और मुझे लगता है कि यह मेरी मां जैसी महिलाओं का सम्मान करने के लिए रखा गया है।” कुणाल की यह बात न केवल उनके पिता के बलिदान को श्रद्धांजलि देती है, बल्कि उन सभी परिवारों की भावनाओं को व्यक्त करती है, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में अपने प्रियजनों को खोया।
संगीता गणबोटे की भावुक प्रतिक्रिया
कौस्तुभ की पत्नी संगीता गणबोटे ने इस कार्रवाई पर गहरी संतुष्टि जाहिर की, लेकिन साथ ही अपने दर्द को भी साझा किया। उन्होंने कहा, “सेना की कार्रवाई बहुत अच्छी है। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम देकर उन्होंने महिलाओं का सम्मान किया है। मैं आज भी कई दिनों तक रोती हूं। हम प्रधानमंत्री मोदी से ऐसी ही कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे, और उन्होंने आतंकियों को करारा जवाब दिया। आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होना चाहिए।” संगीता जी की यह भावनाएं हर उस महिला की आवाज हैं, जिसने आतंकवाद के कारण अपने परिवार को खोया। उनकी बातें सेना के प्रति गर्व और सरकार के प्रति विश्वास को दर्शाती हैं।
शहीदों के परिवारों को मिली सांत्वना
ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि पहलगाम हमले में शहीद हुए लोगों के परिवारों को भी न्याय का अहसास दिलाया। कुणाल और संगीता गणबोटे जैसे परिवारों की प्रतिक्रियाएं दिखाती हैं कि यह कार्रवाई केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जीत भी है। ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ महिलाओं के सम्मान और शहीदों की याद को समर्पित है, जो इसकी गहराई को और बढ़ाता है। यह कार्रवाई हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है, खासकर उन परिवारों के लिए जो इस दुख से गुजरे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों की एक सुनियोजित और सटीक कार्रवाई थी, जिसका नाम पहलगाम हमले में शहीद हुए नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की याद में रखा गया। भारतीय वायुसेना ने राफेल जेट्स और कमिकaze ड्रोन का इस्तेमाल कर जैश-ए-मुहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के 9 ठिकानों को नष्ट किया। ये ठिकाने पाकिस्तान के बहावलपुर, मुरीदके, चक अमरू, सियालकोट और PoK के मुजफ्फराबाद, बाघ, कोटली, गुलपुर, भीमबेर में थे। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में 200 से अधिक आतंकी मारे गए, जिसने आतंकी संगठनों की रीढ़ तोड़ दी। भारत ने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल आतंकी ढांचों के खिलाफ थी, और किसी भी पाकिस्तानी सैन्य या नागरिक सुविधा को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इस ऑपरेशन ने पूरे देश में गर्व और जोश की लहर पैदा कर दी।













