भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और मौजूदा हालात उनके लिए चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे समय में स्थानीय हिंदुओं का संगठित रहना जरूरी है और दुनिया भर के हिंदुओं को मानवीय और नैतिक सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।
पहले ही समझिए पूरी बात
कौन बोले: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
क्या कहा: बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति चिंताजनक
कहां: भारत में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में
कब: रविवार को
क्यों अहम: क्षेत्रीय स्थिरता और अल्पसंख्यक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा
कैसे समाधान संभव: सामाजिक एकजुटता और कूटनीतिक प्रयास
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में हिंदू आबादी देश की कुल जनसंख्या का लगभग आठ प्रतिशत मानी जाती है। समय समय पर वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और संपत्ति नुकसान की घटनाएं सामने आती रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता के दौर में अल्पसंख्यक समुदाय अधिक असुरक्षित महसूस करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में फैली अफवाहें और स्थानीय राजनीति भी तनाव बढ़ाने का कारण बनती हैं।
मोहन भागवत ने क्या कहा
मोहन भागवत ने कहा कि भारत ही ऐसा देश है जहां हिंदू सुरक्षित रूप से अपनी पहचान के साथ रह सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और संभव है कि सरकार पहले से कुछ कदम उठा रही हो।
उनके अनुसार
कुछ प्रयास सार्वजनिक होते हैं
कुछ कूटनीतिक कारणों से सामने नहीं लाए जाते
पर प्रयास जारी रहना जरूरी है
एक पूर्व राजनयिक के मुताबिक ऐसे मामलों में सरकारें अक्सर शांत कूटनीति के जरिए पड़ोसी देशों से बातचीत करती हैं।
#WATCH | Kolkata, West Bengal: On the atrocities against Hindus in Bangladesh, RSS Chief Mohan Bhagwat says, “…They are a minority there, and the situation is quite difficult. Even though it’s difficult, for maximum protection, the Hindus there will have to stay united. And… pic.twitter.com/ZJgn1EG3wk
— ANI (@ANI) December 21, 2025
पश्चिम बंगाल को लेकर बयान
मोहन भागवत ने पश्चिम बंगाल की सामाजिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर हिंदू समाज संगठित हो जाए तो हालात में सुधार आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक बदलाव उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता।
उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का काम समाज को मजबूत बनाना है न कि सत्ता परिवर्तन।
बाबरी मस्जिद से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया
संघ प्रमुख ने हाल ही में सामने आए बाबरी मस्जिद से जुड़े बयान पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पुराने विवादों को फिर से उठाना समाज के हित में नहीं है। उनके अनुसार धार्मिक स्थलों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना किसी भी समुदाय के लिए फायदेमंद नहीं होता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं और इससे विकास से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
सरकारी धन और धार्मिक स्थल
मोहन भागवत ने साफ कहा कि सरकार को धार्मिक स्थल बनाने के लिए सार्वजनिक धन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने सोमनाथ मंदिर और राम मंदिर के उदाहरण देकर बताया कि इन दोनों मामलों में सरकार ने केवल प्रशासनिक भूमिका निभाई थी जबकि निर्माण के लिए धन समाज से ही आया था।
उनके मुताबिक
धार्मिक आस्था समाज का विषय है
सरकार की भूमिका सीमित रहनी चाहिए
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का सम्मान जरूरी है
यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति केवल एक देश का आंतरिक मामला नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और मानवाधिकारों से जुड़ा विषय है। भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा दोनों देशों के रिश्तों को भी प्रभावित करती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि संवाद और सामाजिक सहयोग ही इस तरह के संवेदनशील मुद्दों का दीर्घकालिक समाधान हो सकता है।












