Shikhar Dhawan ठगी मामले में 40 लाख की फर्जीवाड़ा डील उजागर हुई है। पूर्व कर्मचारी और स्टार्टअप CEO पर फर्जी दस्तावेज और अवैध प्रमोशन का आरोप लगा है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। धवन की कंपनी DaOne Group द्वारा दर्ज शिकायत के बाद पुलिस ने गुरुग्राम स्थित एक स्टार्टअप के CEO और धवन के एक पूर्व कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि दोनों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके लगभग 40 लाख रुपये की धोखाधड़ी की और धवन की तस्वीरों को बिना अनुमति उपयोग किया।
फर्जी तरीके से रिन्यू की गई एंडोर्समेंट डील
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खुद को धवन का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर उनकी एक एक्सपायर्ड एंडोर्समेंट डील को मार्च 2025 में अवैध रूप से रिन्यू कर दिया। हैरानी की बात यह है कि उस समय धवन का किसी भी ब्रांड के साथ कोई सक्रिय कॉन्ट्रैक्ट नहीं था।
एशिया कप 2025 के दौरान जब धवन दुबई पहुंचे, तो उन्होंने स्टेडियम की स्क्रीन पर खुद को ब्रांड प्रमोट करते हुए देखा। चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्होंने ऐसा कोई नया करार किया ही नहीं था।
पूर्व कर्मचारी ने रिश्तों का गलत फायदा उठाया
शिकायत में कहा गया है कि धवन के पूर्व कर्मचारी, जो अब Elevate Athletes Creators Ecosystem नाम की कंपनी चला रहे हैं, ने अपनी पुरानी पोजिशन का गलत इस्तेमाल किया।
उन्होंने 20 दिसंबर 2024 का एक फर्जी रिप्रेजेंटेशन एग्रीमेंट बनाया, जिसमें दावा किया गया कि उनकी कंपनी को धवन के एंडोर्समेंट संभालने का एक्सक्लूसिव अधिकार है।
उसी नकली दस्तावेज़ के आधार पर ब्रांड को यह भरोसा दिलाया गया कि डील असली है, जिसके बाद कंपनी ने 40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया — और पूरा पैसा आरोपियों ने अपने पास ही रख लिया।
Shikhar Dhawan का असली करार पहले ही खत्म हो चुका था
असल में, धवन का वैध कॉन्ट्रैक्ट 16 अप्रैल 2024 से 15 अप्रैल 2025 तक था।
यह डील उसी पूर्व कर्मचारी ने साइन कराई थी जब वह DaOne Group के CEO थे।
सितंबर 2024 में उनके इस्तीफा देने के बाद वे किसी भी तरह के अधिकार से पूरी तरह वंचित थे।
FIR दर्ज, आरोपियों से पूछताछ होगी
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
DaOne Group ने यह भी आशंका जताई है कि आरोपियों के पास अन्य फर्जी दस्तावेज़ भी हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल वे और कंपनियों को गुमराह करने में कर सकते हैं। इसलिए पुलिस से उन्हें तुरंत बरामद करने की मांग की गई है।













