टीम इंडिया के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मैदान पर अपनी कप्तानी से वो मुकाम हासिल किया है, जो उन्हें कभी स्कूल की किताबों में नहीं मिला। हाल ही में टी20 विश्व कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करने वाले सूर्या का कप्तानी में जीत का रिकॉर्ड 80 प्रतिशत पहुंच गया है। उन्होंने 52 में से 42 मैच जीतकर साबित कर दिया है कि अगर परिवार बच्चे के जुनून का साथ दे, तो वह किसी भी क्षेत्र में इतिहास रच सकता है।
कप्तान के तौर पर सूर्यकुमार ने 52 में से 42 मैचों में भारत को जीत दिलाई है। उनका यह 80 प्रतिशत का विनिंग रिकॉर्ड उन लाखों युवाओं और माता-पिता के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो कामयाबी को सिर्फ स्कूल और कॉलेज की मार्कशीट से तौलते हैं।
स्कूल में 50 प्रतिशत, मैदान पर 80 का शानदार रिकॉर्ड
मुंबई के रहने वाले सूर्यकुमार यादव अपनी इस ऐतिहासिक सफलता से बेहद खुश हैं। क्रिकेट के मैदान पर अपनी जीत के आंकड़ों को देखकर सूर्या खुद अपनी पुरानी स्कूल की मार्कशीट को याद करते हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि स्कूल और कॉलेज के दिनों में वह कभी 50-60 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं कर पाए थे।
सूर्या ने कहा कि जो प्रतिशत वह अपनी पढ़ाई में हासिल करने की कोशिश करते थे, वह आज उन्हें क्रिकेट के मैदान पर मिल रहा है। हालांकि वह खुद आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन 80 प्रतिशत जीत की दर सुनकर उन्हें बेहद गर्व महसूस होता है। सूर्या का मानना है कि हार किसी को पसंद नहीं होती और मैदान पर उतरने के बाद उनका इकलौता लक्ष्य सिर्फ जीत दर्ज करना होता है।
बीएआरसी में इंजीनियर पिता ने दिया जुनून का साथ
सूर्यकुमार यादव की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का एक बहुत बड़ा त्याग और समझदारी छिपी है। सूर्या के पिता अशोक कुमार यादव भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में एक प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। एक इंजीनियर पिता होने के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे पर पढ़ाई का गैरजरूरी दबाव नहीं बनाया।
परिवार ने शुरुआत में सूर्या को पढ़ाई के लिए काफी प्रेरित किया था। लेकिन जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि उनके बेटे की असली दुनिया किताबों में नहीं, बल्कि क्रिकेट की पिच पर बसती है। माता-पिता ने यह जानकर उन्हें पूरी आजादी दी और कहा कि अगर क्रिकेट में कुछ हासिल नहीं होता, तो परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा है।
‘प्लान बी’ की नहीं आने दी नौबत
परिवार से मिले इसी निडर सपोर्ट ने सूर्यकुमार यादव को मैदान पर एक बेखौफ खिलाड़ी और अब एक सफल कप्तान बना दिया है। हमेशा मुस्कुराते रहने वाले टीम इंडिया के इस दिग्गज बल्लेबाज ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि असली टैलेंट किसी डिग्री का मोहताज नहीं होता। सूर्या ने अपने खेल को उस मुकाम तक पहुंचा दिया, जहां उन्हें कभी अपने करियर में किसी ‘प्लान बी’ का सहारा लेने की नौबत ही नहीं आई।
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