Pakistani espionage: नूंह में पकड़े गए एडवोकेट रिज़वान के जासूसी केस में बड़ा खुलासा—पांच बार अमृतसर जाकर 41 लाख रुपये लाने की बात सामने आई। SIT ने पंजाब से तीन और गिरफ्तारियां कीं। जानें पूरा मामला।
नूंह जिले में पकड़े गए एडवोकेट रिज़वान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की जासूसी और टेरर फंडिंग से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क सामने आने लगा है। जांच एजेंसियों ने अब उसके क़रीबी साथी एडवोकेट मुशर्रफ उर्फ़ परवेज़ से पूछताछ की, जिसने कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। हालांकि परवेज़ को जांच में निर्दोष पाते हुए रिहा कर दिया गया, लेकिन उसके खुलासों ने इस पूरे केस की दिशा बदल दी है।
रिज़वान और परवेज़ की दोस्ती कैसे शुरू हुई? Pakistani espionage
परवेज़ के मुताबिक, उसकी और रिज़वान की पहचान 2022 में सोहना कोर्ट में इंटर्नशिप के दौरान हुई थी। दोनों वकालत की पढ़ाई और प्रैक्टिस को लेकर अक्सर साथ रहते थे।
परवेज़ नूंह कोर्ट में प्रैक्टिस करता था
रिज़वान गुरुग्राम कोर्ट में केस लेता था
दोनों के बीच पेशेवर लेन-देन भी होता था और कई बार वे बाहर घूमने भी जाते थे। परवेज़ का कहना है कि NIA और IB ने 24 नवंबर को जब रिज़वान को पकड़ा, उसके कुछ घंटे बाद ही उसे भी हिरासत में ले लिया गया।
गिरफ्तारी की रात: ‘हमें समझ ही नहीं आया क्या हो रहा है’
परवेज़ बताता है कि जब पुलिस उसे पकड़ने घर पहुंची, तो रिज़वान पहले से ही पुलिस की गाड़ी में बैठा था। वह लगातार पूछता रहा कि आखिर उसे क्यों पकड़ा गया है, लेकिन असली बात बाद में उजागर हुई।
तावडू पुलिस हिरासत में रिज़वान ने पहली बार कबूल किया कि उससे जुड़ा पूरा जासूसी नेटवर्क पकड़ में आ गया है, और यही वजह है कि एजेंसियों ने उसके करीबी लोगों को भी चेक किया।
अमृतसर से जुड़े कई संदिग्ध सफर
जांच में सामने आया कि जुलाई और अगस्त 2023 में रिज़वान परवेज़ को अमृतसर और वाघा बॉर्डर कई बार लेकर गया था।
परवेज़ ने बताया:
एक बार वाघा बॉर्डर जाते समय कुछ लोग स्कूटर से आए और रिज़वान को एक बैग थमा गए।
परवेज़ ने उन लोगों को पहचानने से साफ इनकार किया।
वापसी में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया और उन्हें ट्रेन से वापस आना पड़ा।
अगस्त में परवेज़ दुबारा रिज़वान के साथ अपनी गाड़ी लेने गया। इस बार रिज़वान रात में होटल से अकेले बाहर गया और लौटने पर कहा – “पैसे लेकर आया हूं।”
जांच में खुलासा: 5 बार अमृतसर गया और 41 लाख रुपए लाया
जांच के दौरान सामने आया कि रिज़वान पांच बार अमृतसर जाकर नकद राशि लेकर आया था।
3 बार — 7–7 लाख रुपये
2 बार — 10–10 लाख रुपये
कुल मिलाकर 41 लाख रुपये कैश लाने की बात रिज़वान ने स्वीकार की। ये रकम दो अलग-अलग गाड़ियों – स्कॉर्पियो और स्कोडा – से कुछ लोग देकर जाते थे।
एजेंसियों के मुताबिक, यह पैसा हवाला के जरिए पाकिस्तान की ISI के निर्देश पर भेजा जाता था और फिर पंजाब में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को फंडिंग करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन, पाबंदी भी लग चुकी थी
रिज़वान के दो बैंक खाते मिले –
पंजाब नेशनल बैंक (तावडू)
IndusInd Bank (सोहना)
PNB खाते में ट्रांजैक्शन लिमिट क्रॉस होने के कारण बैंक ने उसे बंद कर दिया था। एजेंसियां इसे हवाला मनी के बड़े प्रवाह का सबूत मान रही हैं। उसके फोन और लैपटॉप में भी संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड मिले हैं।
हालांकि परवेज़ को इन पैसों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए उसे क्लीन चिट दे दी गई।
SIT ने पंजाब से तीन और गिरफ्तारियां कीं
नूंह SIT ने अमृतसर से तीन लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है:
संदीप सिंह उर्फ़ गगन
अमनदीप सिंह
जसकरण सिंह
तीनों पर आरोप है कि वे हवाला नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान से आए करोड़ों रुपये पंजाब और हरियाणा में फैले नेटवर्क तक पहुंचाते थे।
अब तक कुल 5 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच टीम का नेतृत्व तावडू DSP अभिमन्यु लोहान कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह केस बताता है कि पाकिस्तानी हैंडलर अब वकीलों, छात्रों और युवाओं को निशाना बना रहे हैं ताकि आसानी से जानकारी और फंडिंग का प्रवाह हो सके।
सीमावर्ती राज्यों में हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल नई चुनौतियां पैदा कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे मॉड्यूल के जरिए पैसे पहुंचाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है।
पंजाब और हरियाणा दोनों में टेरर फंडिंग की कोशिशें बढ़ी हैं, जो लंबे समय में आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि “ऐसे केस सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को समझने का रास्ता खोलते हैं।”













