Wheat seed scam in Haryana: Strict action by ACB, salesman arrested, shocking revelation: हरियाणा के रेवाड़ी जिले में एक सनसनीखेज गेहूं बीज घोटाला (wheat seed scam) सामने आया है, जिसमें बीज विकास निगम के एक सेल्समैन को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया है। यह सेल्समैन रेवाड़ी के कोसली कस्बे में बीज बिक्री केंद्र पर तैनात था।
इस घोटाले में सब्सिडी (subsidy) के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है, जिसने किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ किया। ACB ने 13 मार्च 2025 को इस मामले में FIR दर्ज की थी और अब इसकी गहन जांच चल रही है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि कैसे यह घोटाला सामने आया।
गेहूं बीज घोटाला: कैसे हुआ खेल? Wheat seed scam
रेवाड़ी के कोसली बिक्री केंद्र पर साल 2020-21 की रबी फसल के लिए 3200 क्विंटल गेहूं के बीज (wheat seeds) की आपूर्ति की गई थी। इन बीजों का सरकारी मूल्य 3350 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था।
हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को राहत देने के लिए 1000 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी (subsidy) की घोषणा की थी। इस सब्सिडी के बाद किसानों को बीज 2350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलना था। इस योजना के तहत कोसली केंद्र को 32 लाख रुपये की सब्सिडी राशि आवंटित की गई थी।
लेकिन, बीज विकास निगम के सेल्समैन सुशील ने इस सब्सिडी (subsidy) का दुरुपयोग किया। उसने 1019 किसानों को 3200 क्विंटल बीज बेचने का दावा किया, लेकिन जांच में पता चला कि कई ऐसे किसानों के नाम पर बीज बिक्री दिखाई गई, जिन्होंने वास्तव में बीज खरीदे ही नहीं।
ACB की टीम ने रेंडम जांच में 211 किसानों के बयान दर्ज किए, जिनमें से कई ने इस बात की पुष्टि की कि उनके नाम पर फर्जी बिक्री (fraudulent sale) दर्ज की गई थी। इस तरह, सब्सिडी की राशि में हेराफेरी कर लाखों रुपये का गबन किया गया।
ACB की सख्त कार्रवाई
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस गेहूं बीज घोटाले (wheat seed scam) को गंभीरता से लिया और 13 मार्च 2025 को सेल्समैन सुशील के खिलाफ FIR दर्ज की। जांच के बाद उसे कोसली से गिरफ्तार (arrest) कर लिया गया। ACB अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
ACB के अधिकारियों ने बताया कि यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला है, बल्कि यह उन मेहनतकश किसानों (farmers) के साथ धोखा है, जो सब्सिडी की उम्मीद में बीज खरीदते हैं।
किसानों के हितों पर चोट
यह गेहूं बीज घोटाला (wheat seed scam) हरियाणा के किसानों (farmers) के लिए एक बड़ा झटका है। सब्सिडी का लाभ उन तक नहीं पहुंचा, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी। इसके बजाय, फर्जी बिक्री (fraudulent sale) के जरिए सरकारी धन का गबन किया गया।
किसानों का कहना है कि ऐसी योजनाओं पर भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि बीज बिक्री केंद्रों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित ऑडिट जरूरी हैं।
भविष्य में घोटालों से बचाव के उपाय
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता (transparency) की जरूरत को रेखांकित किया है। ACB ने सुझाव दिया है कि बीज बिक्री केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल पेमेंट सिस्टम लागू किए जाएं ताकि फर्जी बिक्री (fraudulent sale) को रोका जा सके।
साथ ही, किसानों (farmers) को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों और सब्सिडी (subsidy) की जानकारी रख सकें। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
समाज और सरकार से अपील
यह गेहूं बीज घोटाला (wheat seed scam) न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि यह किसानों के विश्वास के साथ खिलवाड़ भी है। रेवाड़ी के लोग और किसान संगठन इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ACB की यह कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे और प्रभावी बनाने के लिए पूरे सिस्टम में सुधार की जरूरत है। किसानों (farmers) से अपील है कि वे किसी भी अनियमितता को तुरंत प्रशासन के सामने लाएं और अपनी शिकायत दर्ज कराएं।











