10-day Bharatanatyam workshop in Chandigarh to continue till June 4: चंडीगढ़ में भरतनाट्यम कार्यशाला (Bharatanatyam Workshop Chandigarh) ने सेक्रेड हार्ट स्कूल को भारतीय संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया है। 24 मई से शुरू हुई यह 10 दिवसीय कार्यशाला 4 जून तक चलेगी। इसमें 3 से 17 साल की 70 से ज्यादा बालिकाएं हिस्सा ले रही हैं। प्रसिद्ध नृत्य प्रशिक्षक राहुल और नंदिनी गुप्ता की अगुवाई में यह आयोजन नन्हे दिलों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य (Indian Classical Dance) की दुनिया से जोड़ रहा है। यह कार्यशाला केवल नृत्य सिखाने का मंच नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का उत्सव है।
Bharatanatyam workshop: नृत्य के साथ संस्कृति का पाठ
हर सुबह 8 से 10 बजे तक स्कूल का हॉल पारंपरिक पोशाक में नंगे पांव नाचती बालिकाओं की ताल से गूंज उठता है। इस कार्यशाला में बच्चियों को भरतनाट्यम की बुनियादी मुद्राएं, नृत्य चरण, और पुष्पांजलि, आलारिपू जैसे प्रदर्शन सिखाए जा रहे हैं (Bharatanatyam Training). प्रशिक्षक न केवल नृत्य की तकनीक बता रहे हैं, बल्कि इसके पीछे की कहानियां और भावनाएं भी समझा रहे हैं। यह अनुभव बालिकाओं को अनुशासन, समर्पण और भारतीय संस्कृति (Indian Culture) के प्रति सम्मान सिखा रहा है। बच्चियों का उत्साह देखकर लगता है कि वे इस कला को दिल से अपना रही हैं।
स्कूल की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता
सेक्रेड हार्ट स्कूल में यह चौथी भरतनाट्यम कार्यशाला है, जो स्कूल की सांस्कृतिक शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रधानाचार्या सिस्टर वेनीता जोसेफ का योगदान इस आयोजन को खास बनाता है। उनकी प्रेरणा और समर्थन ने इस कार्यशाला को संभव बनाया। सिस्टर वेनीता का कहना है कि ऐसी पहल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ती है (Cultural Education Chandigarh). यह कार्यशाला न केवल नृत्य सिखाती है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव भी जगाती है। स्कूल का यह प्रयास शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
भविष्य की नृत्यांगनाओं का उत्साह
राहुल और नंदिनी गुप्ता का कहना है कि इन बालिकाओं का जोश और समर्पण प्रेरणादायक है। “इन बच्चों को भरतनाट्यम सिखाना हमारे लिए गर्व की बात है,” नंदिनी ने कहा। यह कार्यशाला नन्हे मनों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की अमूल्य धरोहर से जोड़ रही है (Bharatanatyam Classes Chandigarh). बच्चियां न केवल नृत्य सीख रही हैं, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहराई को भी समझ रही हैं। यह आयोजन चंडीगढ़ में सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।











