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Ahoi Ashtami 2025 पर Sirsa में इस समय निकलेगा चांद, जानें अहोई अष्टमी की व्रत कथा

On: अक्टूबर 9, 2025 6:01 अपराह्न
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Ahoi Ashtami 2025 पर Sirsa में इस समय निकलेगा चांद, जानें अहोई अष्टमी की व्रत कथा
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Ahoi Ashtami 2025 Sirsa jile mein chand kab nikalega: अहोई अष्टमी एक ऐसा भारतीय त्योहार है जो अहोई माता को समर्पित है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। यह करवा चौथ के चार दिन बाद और दीवाली से आठ दिन पहले मनाया जाता है। हालांकि, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में, जहां अमांत पंचांग का पालन होता है, यह आश्विन मास में आता है।

अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी माताओं का खास पर्व है, जिसमें वे अपने बच्चों की सलामती के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं। पहले यह व्रत सिर्फ बेटों के लिए रखा जाता था, लेकिन अब माताएं अपने सभी बच्चों बेटे और बेटियों के लिए यह उपवास करती हैं। इस दिन माताएं पूरी भक्ति के साथ अहोई माता की पूजा करती हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। व्रत का पारण तारे या चंद्रमा देखने के बाद किया जाता है।

यह दिन संतानहीन दंपत्तियों के लिए भी बहुत खास है। जिन महिलाओं को गर्भधारण में मुश्किल हो रही है या जिनका गर्भपात हुआ है, वे इस दिन अहोई माता का व्रत रखकर बेटे की प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं। इस वजह से इसे ‘कृष्णाष्टमी’ भी कहा जाता है। मथुरा का राधा कुंड इस दिन दंपत्तियों और भक्तों से भरा रहता है, जो पवित्र स्नान के लिए वहां पहुंचते हैं।

Ahoi Ashtami 2025 पर Sirsa में इस समय निकलेगा चांद

अहोई अष्टमी 2025 में सोमवार, 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। पूजा और व्रत के लिए शुभ समय इस प्रकार है:

अष्टमी तिथि शुरू: 13 अक्टूबर, दोपहर 12:24 से

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अष्टमी तिथि समाप्त: 14 अक्टूबर, सुबह 11:09 तक

पूजा मुहूर्त: शाम 5:40 से 7:19 तक

तारों की पूजा: शाम 6:28 से 6:45 के बीच; माताएं तारे देखने के बाद व्रत खोलती हैं

चंद्रोदय: 14 अक्टूबर को रात 12:03 से 12:09 के बीच

अहोई अष्टमी की व्रत कथा

अहोई अष्टमी की कथा एक मां की भक्ति और पश्चाताप की कहानी है। पुराने समय में एक महिला के सात बेटे थे। एक दिन वह जंगल में मिट्टी लेने गई। मिट्टी खोदते समय उसने अनजाने में एक साही (सेई) के बच्चे की जान ले ली। साही ने गुस्से में उसे श्राप दिया। इसके बाद कुछ सालों में उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई। महिला को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अपने बच्चों को वापस पाने के लिए छह दिन का कठोर व्रत रखा और अहोई माता की पूजा की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उसके सातों बेटों को जीवित कर दिया। तभी से माताएं यह व्रत रखती हैं।

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अहोई अष्टमी व्रत विधि

अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ की तरह ही होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि करवा चौथ पति की लंबी उम्र के लिए और अहोई माता का व्रत बच्चों की सलामती के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठती हैं। स्नान के बाद, वे अपने बच्चों की लंबी और सुखी जिंदगी के लिए व्रत का संकल्प लेती हैं। संकल्प के अनुसार, माताएं बिना खाना और पानी के व्रत रखती हैं और इसे तारे या चंद्रमा देखने के बाद ही खोलती हैं।

अहोई अष्टमी पूजा विधि

अहोई अष्टमी की पूजा की तैयारी सूर्यास्त से पहले करनी चाहिए।
सबसे पहले दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाया जाता है। चित्र में आठ कोने (अष्ट कोष्ठक) होने चाहिए, क्योंकि यह अष्टमी तिथि से जुड़ा है। साथ ही सेई (साही का बच्चा) का चित्र भी बनाया जाता है।

लकड़ी के पटरे पर माता के चित्र के बाईं ओर जल से भरा एक पवित्र कलश रखा जाता है। कलश पर स्वास्तिक बनाया जाता है और इसके चारों ओर पवित्र धागा (मोली) बांधा जाता है।

इसके बाद अहोई माता को चावल, दूध और व्यंजन (पकवान) जैसे पूरी, हलवा और पुआ चढ़ाए जाते हैं। ज्वार जैसे कच्चे अनाज भी माता को भेंट किए जाते हैं।
परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला सभी महिलाओं को अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनाती है। कथा सुनते समय प्रत्येक महिला के हाथ में सात गेहूं के दाने होने चाहिए।

पूजा के अंत में अहोई अष्टमी की आरती की जाती है।

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कुछ समुदायों में चांदी की अहोई माता, जिसे स्याउ कहते हैं, बनाई और पूजी जाती है। पूजा के बाद इसे दो चांदी की मोतियों के साथ धागे में पेंडेंट के रूप में पहना जा सकता है। पूजा पूरी होने के बाद, महिलाएं परिवार की परंपरा के अनुसार तारों या चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद ही वे अपना व्रत खोलती हैं।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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