Sirsa flood, (सिरसा) : सिरसा में घग्गर नदी ने रौद्र रूप दिखाया है। पनिहारी-बुर्जकर्मगढ़ के बीच टूटा तटबंध 60 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद 10 गांवों के ग्रामीणों ने पाट दिया। रविवार रात को 10 फुट का कटाव हुआ था, जो सोमवार सुबह तक 25 फुट तक बढ़ गया। ग्रामीण अब इसे और मजबूत करने में जुटे हैं। पानी का तेज बहाव नेजाडेला कलां, फरवाईं खुर्द, फरवाई कलां, पनिहारी और बुर्जकर्मगढ़ की ओर बढ़ रहा है। करीब 10,000 एकड़ में धान और नरमा की फसलें डूब चुकी हैं, और 30 से ज्यादा ढाणियां खतरे में हैं। लोग सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं।
ग्रामीणों का जज्बा
टूटे तटबंध को बचाने के लिए 10 गांवों के लोग एकजुट हुए। दड़बी, बरूवाली, नागोकी, मल्लेवाला, नेजाडेला खुर्द, नेजाडेला कलां, फरवाई खुर्द, फरवाई कलां, बुर्जकर्मगढ़ और झंडा खुर्द के ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर काम शुरू किया। पानी का बहाव कम करने के लिए पेड़ काटकर तटबंध के साथ लगाए गए। रस्से, जाल, लोहे की एंगल और मिट्टी के बैग से तटबंध को बांधा गया। पनिहारी में पुल निर्माण के कारण रास्ता मुश्किल था, लेकिन ग्रामीणों ने JCB से मिट्टी डालकर रास्ता बनाया, ताकि ट्रैक्टर सामान ले जा सकें।
जलस्तर और नुकसान
दो दिनों में सरदूलगढ़ के पास जलस्तर 3,000 क्यूसेक कम हुआ, जो ग्रामीणों के लिए राहत की बात है। लेकिन गुहला चीका में जलस्तर 53,695 क्यूसेक तक पहुंच गया, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ा है। ओटू हेड से 28,680 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। अहमदपुर झोरड़नाली और मीरपुर के छोटे बांध अभी भी टूटे हैं। 150 से ज्यादा ट्यूबवेल और सोलर पैनल पानी में डूब गए, और ढाणियों में पशुओं के चारे का संकट पैदा हो गया है। कुल 15,000 एकड़ से ज्यादा भूमि प्रभावित हुई है।
प्रशासन का आश्वासन
सोमवार को डीसी शांतनु शर्मा ने अधिकारियों के साथ पनिहारी में टूटे तटबंध का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों का हौसला देखते बनता है, जो युद्धस्तर पर तटबंध को मजबूत करने में जुटे हैं। लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है, और ग्रामीणों को स्थाई समाधान की जरूरत है।













