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Charkhi Dadri में Ahoi Ashtami 2025 का चांद इस समय दिखेगा, जानें अहोई अष्टमी के नियम

On: October 10, 2025 12:18 PM
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Charkhi Dadri में Ahoi Ashtami 2025 का चांद इस समय दिखेगा, जानें अहोई अष्टमी के नियम
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Charkhi Dadri mein Ahoi Ashtami 2025 ka chand kab nikalega: अहोई अष्टमी, माताओं का वो खास त्योहार है, जिसमें मां अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए दिल से प्रार्थना करती है। खासकर उत्तर भारत में ये पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है। ये व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, यानी दीवाली से आठ दिन पहले, रखा जाता है। ठीक करवा चौथ की तरह, ये भी निर्जला व्रत है, जिसमें माताएं बिना अन्न-जल के दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को तारा देखने के बाद व्रत खोलती हैं। साल 2025 में अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी।

Charkhi Dadri में Ahoi Ashtami 2025 का चांद इस समय दिखेगा

तारीख: 13 अक्टूबर 2025, सोमवार

अष्टमी तिथि शुरू: 13 अक्टूबर, सुबह 1:36 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 14 अक्टूबर, रात 12:27 बजे

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पूजा मुहूर्त: शाम 5:40 से 6:55 बजे तक

तारा देखने का समय: शाम 6:45 से 7:00 बजे तक (स्थानीय समय की जांच करें)

अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी माता पार्वती के अहोई स्वरूप को समर्पित है। माताएं इस दिन अपने बच्चों को बीमारी, खतरे और अकाल मृत्यु से बचाने के लिए प्रार्थना करती हैं। ये व्रत सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि मां के प्यार, त्याग और भगवान पर भरोसे का प्रतीक है। माताएं अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस दिन पूरी श्रद्धा से उपवास रखती हैं।

अहोई अष्टमी की व्रत कथा

इस व्रत के पीछे एक प्राचीन कहानी है। एक महिला ने अनजाने में मिट्टी खोदते समय एक शेर के बच्चे को मार डाला। इस कर्म के श्राप से उसने अपने सभी बच्चे खो दिए। गहरे पश्चाताप में उसने अहोई माता की प्रार्थना की और कठोर व्रत रखा। उसकी सच्चाई से माता प्रसन्न हुईं और उनके बच्चों को जीवनदान दिया। तब से माताएं अपने बच्चों की रक्षा, आशीर्वाद और पापों की क्षमा के लिए ये व्रत रखती हैं।

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अहोई अष्टमी की पूजा विधि

सूर्योदय से पहले

  • सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर बिना अन्न-जल के उपवास रखें और मौन रहें या मंत्र जाप करें।
  • शाम की पूजा (5:40 से 6:55 बजे)
  • एक दीवार को साफ करें और उस पर अहोई माता का चित्र बनाएं या प्रिंटेड चित्र लगाएं।
  • पूजा स्थल पर कलश, दीया, कच्चा दूध और अगर संभव हो तो चांदी का सिक्का या अहोई प्रतीक रखें।
  • माता को अनाज, रोली, चावल, मिठाई और फल अर्पित करें।
  • बच्चों के साथ बैठकर अहोई अष्टमी की कथा सुनें।
  • आरती करें और प्रत्येक बच्चे के नाम से व्यक्तिगत प्रार्थना करें।

तारा देखने के बाद

जैसे ही आसमान में पहला तारा दिखे, तारे को अर्घ्य (जल) अर्पित करें।
इसके बाद पानी पीकर और सात्विक भोजन करके व्रत खोलें।
पहला भोजन अक्सर परिवार के साथ साझा किया जाता है, जो मां और बच्चों के बीच प्यार को और गहरा करता है।

महत्वपूर्ण परंपराएं और सुझाव

कई महिलाएं जिनके बच्चे नहीं हैं, वो भी संतान प्राप्ति या आशीर्वाद के लिए ये व्रत रखती हैं। कुछ माताएं इच्छा पूरी होने पर चांदी का सिक्का, सिला हुआ कपड़ा या फल दान करती हैं। पूजा के दौरान बच्चों का साथ होना प्रार्थना की शक्ति को बढ़ाता है। इस दौरान ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचें और ममता व आध्यात्मिकता पर ध्यान दें।

क्षेत्रीय परंपराएं

दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब: यहां अहोई माता की दीवार कला, कथा वाचन और थाली सजावट के साथ उत्साह से पर्व मनाया जाता है।
महाराष्ट्र और गुजरात: परंपरागत रूप से कम प्रचलित, लेकिन शहरी परिवारों में अब ये पर्व लोकप्रिय हो रहा है।
अहोई माता मंदिर: इनमें बड़ी संख्या में सामूहिक पूजा और प्रार्थनाएं होती हैं।

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आध्यात्मिक महत्व

ये व्रत मातृत्व की शक्ति, आत्म-अनुशासन और ईश्वर पर भरोसे को मजबूत करता है। ये दिन परिवार और बच्चों से जुड़े कर्मों को शुद्ध करने का मौका देता है। ये माता-पिता के लिए भावनात्मक बंधन, कृतज्ञता और आध्यात्मिक जिम्मेदारी को बढ़ाता है। साथ ही, ये उन परिवारों को शांति और ताकत देता है, जो संतान प्राप्ति, सुरक्षा या उपचार की कामना करते हैं।

घर पर अहोई अष्टमी कैसे मनाएं

आप घर पर आसान तरीकों से इस पवित्र व्रत को मना सकते हैं:

  • घर को साफ करें और अहोई माता के लिए एक छोटा पूजा स्थल या दीवार तैयार करें।
  • दीया, रंगोली, फूल और अपने बच्चे की तस्वीर या नेमप्लेट का उपयोग करें।
  • “ॐ अहोई भगवती नमः” या “ॐ दुर्गायै नमः” का जाप करें।
  • अपने बच्चे या परिवार के साथ अहोई अष्टमी की कथा साझा करें।
  • तारा देखने के बाद कृतज्ञता के साथ व्रत खोलें।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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