रोहतक (Sarang & Bharangam 2026) : रोहतक की दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (DLCSUPVA) का प्रांगण मंगलवार को कला और संस्कृति के अनूठे रंगों में सराबोर नजर आया।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के सहयोग से आयोजित ‘भारत रंग महोत्सव’ (भारंगम) और यूनिवर्सिटी के अपने फेस्ट ‘सारंग’ के दूसरे दिन थियेटर के साथ-साथ म्यूजिक का भी जबरदस्त तड़का लगा।
कार्यक्रम में बॉलीवुड और रंगमंच के दिग्गज अभिनेता यशपाल शर्मा और जतिन सरना बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कुलगुरू डॉ. अमित आर्य और रजिस्ट्रार गुंजन मलिक मनोचा ने अतिथियों का पारंपरिक स्वागत कर महोत्सव के दूसरे दिन का आगाज किया।
अभिनय की क्लास: मोबाइल छोड़ो, फोकस करो
‘सारंग’ के मंच पर यशपाल शर्मा ने छात्रों से सीधा संवाद किया। उन्होंने वर्तमान दौर को चमत्कारिक बताते हुए कहा कि आज सीखने की अपार संभावनाएं हैं। यशपाल ने युवाओं को मोबाइल का सही और सीमित उपयोग करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने से युवा अपना फोकस खो रहे हैं, जबकि अभिनय और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एकाग्रता बेहद जरूरी है।” उन्होंने कैरेक्टराइजेशन (चरित्र चित्रण) पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी स्क्रिप्ट मिले तो उसे चार-पांच बार पढ़ें। उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि अगर आप इंस्पेक्टर का रोल कर रहे हैं, तो आपको उसकी सैलरी, व्यवहार और परिवार की पृष्ठभूमि पता होनी चाहिए।
उन्होंने भरत मुनि के नाट्यशास्त्र के चार तत्वों वाचिक, आंगिक, आहायम और सात्विक की विस्तार से जानकारी दी। यशपाल ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आने वाले समय में छात्र सुपवा में दाखिला लेने के लिए तरसेंगे।
जतिन सरना का मंत्र: पढ़ना, देखना और समझना
अभिनेता जतिन सरना ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छा अभिनेता बनने के लिए पढ़ना, देखना और समझना अनिवार्य है। केवल एक-दो नाटक कर लेने से कोई अभिनेता नहीं बन जाता, इसके लिए समय और नियमित अभ्यास (Practice) जरूरी है। उन्होंने सुपवा के इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ करते हुए कहा कि छात्रों को एक ही छत के नीचे मिल रही सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए।
नाटकों ने बांधा समां, सम्मानित हुए कलाकार
महोत्सव में कला का प्रदर्शन भी बेमिसाल रहा। दोपहर के सत्र में तमिल और अंग्रेजी भाषा में नाटक ‘पेन नदई कूथु – महिलाओं की चाल’ का मंचन हुआ। शाम को ‘भारंगम’ के तहत पंजाबी नाटक ‘संबल’ में कलाकारों ने दमदार अभिनय पेश किया। इसके अलावा मंडी हाउस के म्यूजिक ग्रुप और सुपवा के छात्रों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कुलगुरू डॉ. अमित आर्य ने सांसद मनोज तिवारी के वक्तव्य का जिक्र करते हुए ‘सुपवा’ शब्द को छठ पूजा से जुड़ा पवित्र शब्द बताया। कार्यक्रम के अंत में प्रदेश में रंगमंच को जीवित रखने वाले कलाकारों नरेश प्रेरणा, केसरी नंदन, रवि मोहन, मनीष जोशी, कृष्ण नाटक, संगीता किमोठी, मदन डागर, सतीश मस्तान, रमेश मूर्ति, अविनाश सैनी, अमनजीत, डॉ. आनंद शर्मा और रघुवेंद्र मलिक को सम्मानित किया गया।
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