fire in Agroha mound of Haryana Forest burning amidst historical excavation, treasure of skeletons and remains in danger: हरियाणा के अग्रोहा में स्थित ऐतिहासिक टीले के 125 एकड़ जंगल में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। यह घटना तब हुई, जब पुरातत्व विभाग पिछले 45 दिनों से टीले पर खुदाई कर रहा था, जिसमें मानव कंकाल, प्राचीन सिक्के और बौद्ध स्तूप जैसे अनमोल अवशेष मिले हैं।
तेज हवाओं के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है, और पास के मेडिकल कॉलेज व मंदिर परिसर तक इसके फैलने का खतरा है। ग्रामीण और दमकल विभाग मिलकर आग बुझाने में जुटे हैं। यह घटना न केवल ऐतिहासिक धरोहर के लिए खतरा है, बल्कि क्षेत्र में चिंता का विषय बन गई है। आइए, इस घटना और अग्रोहा टीले की महत्वपूर्ण खोजों को समझते हैं।
जंगल में आग, खतरे में ऐतिहासिक धरोहर Fire in Agroha Mound
अग्रोहा का ऐतिहासिक टीला, जो पुरातत्वविदों के लिए खजाने से कम नहीं, आज एक भयावह आग की चपेट में है। 125 एकड़ में फैले इस जंगल में लगी आग ने प्रशासन और स्थानीय लोगों को सकते में डाल दिया है। आग उस समय भड़की, जब पुरातत्व विभाग की टीम टीले पर खुदाई कर रही थी।
तेज हवाओं ने आग को और विकराल बना दिया, जिससे इसे बुझाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो पास के मेडिकल कॉलेज और मंदिर परिसर को भी नुकसान हो सकता है, जिससे जान-माल का भारी खतरा है।
दमकल और ग्रामीणों का संघर्ष
आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और प्रशासन हरकत में आए। हालांकि, टीले तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता खड़ी चढ़ाई वाला है, जिसके कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच पा रही हैं। अग्रोहा थाना प्रभारी ने बताया कि आसपास के गांवों में अनाउंसमेंट कर ग्रामीणों से मदद मांगी गई है।
ग्रामीण ट्रैक्टरों से पानी के टैंकर और तसलों में मिट्टी लेकर आग बुझाने में जुटे हैं। यह सामुदायिक प्रयास इस आपदा से निपटने की भावना को दर्शाता है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं।
खुदाई में मिला अनमोल खजाना
अग्रोहा टीला पुरातत्वविदों के लिए एक ऐतिहासिक खजाना है। चंडीगढ़ सर्कल के पुरातत्व विभाग की टीम, निदेशक कामेई अथोइलू काबुई के नेतृत्व में, पिछले 45 दिनों से यहां खुदाई कर रही है।
शनिवार को ही 10×10 फीट के एक ट्रेंच से मानव कंकाल की खोपड़ी मिली, जो टीले की ऊपरी परत में थी। उप निदेशक डॉ. अर्कित प्रधान के अनुसार, यह कंकाल ज्यादा पुराना नहीं लगता, और आगे की खुदाई में इसके बाकी हिस्से मिलने की उम्मीद है। कंकाल की लैब जांच से इसके लिंग और उम्र का पता चलेगा।
प्राचीन सभ्यता के निशान
अग्रोहा टीले की खुदाई में चौथी से 14वीं शताब्दी तक के अवशेष मिले हैं, जो इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। पुरातत्व विभाग ने अब तक 7,000 से ज्यादा कलाकृतियां बरामद की हैं,
जिनमें कमल पुष्प की आकृतियों वाले पत्थर, प्राचीन इमारतों की दीवारें, मिट्टी की हांडियां, सीढ़ियों के अवशेष, मिट्टी के खिलौने, स्नान में प्रयुक्त पत्थर, मिट्टी के मनके और छोटे गोल बर्तन शामिल हैं। इसके अलावा, एक बौद्ध स्तूप और हिंदू मंदिर के अवशेष भी मिले हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर करते हैं।
सिक्कों का खजाना
खुदाई में 4 इंडो-ग्रीक, 1 पंच-मार्क और अग्रोदका के 51 सिक्कों सहित कुल 56 सिक्के मिले हैं। ये सिक्के रोमन, कुषाण, यौधेय और गुप्त साम्राज्य से संबंधित हैं, जिनमें प्राकृत भाषा का उपयोग हुआ है।
इसके अलावा, चांदी और कांस्य के सिक्के, लोहे और तांबे के उपकरण, पत्थर की मूर्तियां और अर्ध-कीमती पत्थरों के मोती भी बरामद हुए हैं। ये खोजें अग्रोहा को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की संभावना को मजबूत करती हैं।
आग का खतरा और चिंता
आग की यह घटना उस समय हुई, जब टीले पर खुदाई अपने चरम पर थी। नोएडा संस्थान के छात्र, जो खुदाई में सहायता कर रहे थे, को सुरक्षा के लिए हॉस्टल भेज दिया गया है।
पुरातत्व विभाग की उप निदेशक बनानी भट्टाचार्य ने बताया कि मिले अवशेषों की सुरक्षा और कंकाल की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन आग ने इन अनमोल खोजों को खतरे में डाल दिया है। अगर आग टीले के अन्य हिस्सों तक फैली, तो ये ऐतिहासिक अवशेष नष्ट हो सकते हैं।
समाज के लिए संदेश
यह घटना हमें ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के प्रति जागरूक होने का संदेश देती है। अग्रोहा टीला न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे भारत के लिए एक सांस्कृतिक खजाना है।
हमें चाहिए कि हम ऐसी धरोहरों की रक्षा के लिए मिलकर काम करें। प्रशासन को चाहिए कि वह आग बुझाने के लिए बेहतर संसाधन और रास्ते सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
अग्रोहा का भविष्य
अग्रोहा टीला विश्व धरोहर बनने की राह पर है। इसकी खुदाई से मिले अवशेष हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की कहानी कहते हैं। लेकिन इस आग ने हमें सतर्क कर दिया है कि इन धरोहरों की सुरक्षा कितनी जरूरी है। आइए, हम सब मिलकर अग्रोहा को बचाने और इसे विश्व पटल पर स्थापित करने में योगदान दें।












