Fire in blanket factory in Panipat Driver dies a painful death : हरियाणा के पानीपत में एक दिल दहलाने वाली घटना ने सभी को झकझोर दिया। भारत नगर की कंबल फैक्ट्री में शनिवार दोपहर लगी भीषण आग में फैक्ट्री मालिक का ड्राइवर आशीष मलिक जिंदा जल गया। दमकल विभाग की 15 गाड़ियां घंटों मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पा सकीं। पुलिस ने शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। यह हादसा सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाता है। आइए, इस त्रासदी की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारणों को समझें।
आग का तांडव: ड्राइवर की दर्दनाक मौत Fire in blanket factory
पानीपत के रिफाइनरी रोड पर दिल्ली पैरलल नहर के किनारे स्थित भारत नगर में मोनित ट्रेडिंग कंपनी की कंबल फैक्ट्री में शनिवार दोपहर 3 बजे आग लग गई। फैक्ट्री मालिक दीपक गोयल का ड्राइवर, 27 वर्षीय आशीष मलिक, आग बुझाने के लिए फायर सेफ्टी सिलेंडर लेकर अंदर गया। लेकिन इस दौरान फैक्ट्री का शेड गिर गया, जिससे बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। आशीष ने दूसरे गेट से निकलने की कोशिश की, लेकिन वह भी बंद था। आखिरकार, वह आग की चपेट में आ गया और उसकी जलने से मौत हो गई।
दमकल और पुलिस की कोशिशें
आग की सूचना मिलते ही आसपास के कर्मचारियों ने पुलिस और दमकल विभाग को सूचित किया। पानीपत सहित आसपास के तीन जिलों से 15 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने हाइड्रा की मदद से गिरे शेड को तोड़ा और रात करीब 8:30 बजे आशीष का शव बाहर निकाला। शव पूरी तरह जल चुका था और इसे पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल के शवगृह में भेजा गया। कई घंटों की कोशिश के बावजूद आग पर काबू नहीं पाया जा सका, जिससे फैक्ट्री को भारी नुकसान हुआ।
परिवार का दर्द: आशीष की कहानी
आशीष मलिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले के खरड़ गांव के रहने वाले थे। उनके भाई आदेश ने बताया कि वह तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और हाल ही में पानीपत के शिमला मौलाना गांव में किराए के मकान में रह रहे थे। आशीष पिछले चार साल से मोनित ट्रेडिंग कंपनी में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे थे। शनिवार शाम 3:45 बजे आग की सूचना मिली, और सुपरवाइजर सोनू ने बताया कि आशीष आग बुझाने गया था, लेकिन शेड गिरने से फंस गया। परिवार का कहना है कि यह हादसा फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हुआ।
सुरक्षा पर सवाल: क्या लापरवाही थी जिम्मेदार?
यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा पर कई सवाल खड़े करता है। आशीष की मौत के लिए बंद गेट, शेड की कमजोर संरचना, और अपर्याप्त फायर सेफ्टी इंतजाम जिम्मेदार हो सकते हैं। दमकल गाड़ियों की देरी और आग पर काबू न पाने की नाकामी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। यह घटना फैक्ट्री मालिकों और प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता था।
समाज और प्रशासन के लिए सुझाव
यह हादसा हमें कार्यस्थल सुरक्षा की अहमियत सिखाता है। अगर आप किसी फैक्ट्री या औद्योगिक इकाई में काम करते हैं, तो फायर सेफ्टी उपकरणों और आपातकालीन निकास की उपलब्धता की जांच करें। फैक्ट्री मालिकों को नियमित सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी ट्रेनिंग देनी चाहिए। आम लोग किसी भी आग की घटना को देखें, तो तुरंत दमकल विभाग (101) या पुलिस हेल्पलाइन (112) पर सूचना दें। प्रशासन को ऐसी घटनाओं की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
पानीपत की इस त्रासदी ने न केवल एक परिवार को दुख में डुबोया, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा और फायर सेफ्टी के मुद्दों को उजागर किया। यह खबर उन लोगों के लिए जरूरी है, जो फैक्ट्री में काम करते हैं या ऐसी इकाइयों के आसपास रहते हैं। यह हमें सतर्क रहने और सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लेने की सीख देती है।












