चंडीगढ़ , 12 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबरों के बीच एक बड़ा आर्थिक झटका लगने की तैयारी है। भले ही सरकार ने टैरिफ में सीधी बढ़ोतरी न की हो, लेकिन बिजली वितरण निगमों (UHBVN और DHBVN) ने पिछले दरवाजे से वसूली का प्लान तैयार कर लिया है। निगमों ने हरियाणा राज्य विद्युत विनियामक आयोग (HERC) से ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) के नाम पर 47 पैसे प्रति यूनिट वसूलने की इजाजत मांगी है। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के मुताबिक, आयोग इस पर 14 मई को अंतिम मुहर लगाएगा, जिससे प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं का मासिक बजट बिगड़ना तय है।
FSA का नया नाम अब होगा FPPAS
हरियाणा में साल 2022-23 से ही उपभोक्ताओं से फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) वसूला जा रहा है। अब बिजली निगमों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसे नया नाम FPPAS देते हुए वसूली जारी रखने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान नियमों के तहत, जो परिवार महीने में 200 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं, उन्हें हर यूनिट पर 47 पैसे अतिरिक्त देने होते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 मई तक इस प्रस्ताव पर जनता की आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे। चूंकि आयोग ने मूल टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर दिया था, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि वह इस अधिभार को हरी झंडी दे सकता है।
उत्पादन लागत बढ़ने से सरकार पर बढ़ा सब्सिडी का बोझ
बिजली उत्पादन की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है, जो अब 7.35 रुपये से बढ़कर 7.48 रुपये प्रति यूनिट पर पहुंच गई है। इस लागत वृद्धि के कारण राज्य सरकार को नए वित्त वर्ष में करीब 1089 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी। प्रदेश में कुल 83 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 7 लाख किसान हैं। सरकार ने किसानों के लिए बिजली खपत का कोटा भी 9 हजार मिलियन यूनिट से बढ़ाकर 10 हजार मिलियन यूनिट कर दिया है। इससे सरकारी खजाने पर कुल सब्सिडी का बोझ अब 6782 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
अधिभार लगाने के पीछे की असली वजह
बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले और अन्य ईंधनों की कीमतों में वैश्विक स्तर पर उतार-चढ़ाव हो रहा है। वितरण कंपनियों को मांग पूरी करने के लिए कई बार शॉर्ट टर्म में महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। बिजली कंपनियों को इस वित्तीय घाटे से बचाने के लिए नियामक आयोग उन्हें ‘फ्यूल सरचार्ज’ वसूलने की अनुमति देता है। हालांकि, किसानों के लिए राहत बरकरार रहेगी। ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए उन्हें पहले की तरह मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट ही भुगतान करना होगा, जबकि बाकी की बड़ी राशि सरकार सब्सिडी के जरिए बिजली निगमों को चुकाएगी।
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