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Haryana Roadways Employees Strike: 21-22 अप्रैल को भूख हड़ताल, जानें क्या हैं मांगें

On: अप्रैल 20, 2025 2:56 अपराह्न
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Haryana Roadways Employees Strike: 21-22 अप्रैल को भूख हड़ताल, जानें क्या हैं मांगें
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Haryana Roadways Employees Strike Hunger strike on 21-22 April: हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी अपनी अनसुनी मांगों को लेकर फिर से आंदोलन की राह पर हैं। 21 और 22 अप्रैल को दो दिन की भूख हड़ताल का ऐलान किया गया है। कर्मचारी बसों की कमी, निजीकरण और लंबित भुगतानों जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।

कर्मचारियों का गुस्सा: मांगें अनसुनी, हड़ताल की तैयारी Haryana Roadways Employees Strike

हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कैथल डिपो में हाल ही में हुई यूनियन की बैठक में कर्मचारियों ने 21 और 22 अप्रैल को भूख हड़ताल करने का फैसला लिया। यूनियन का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है, जिससे कर्मचारियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बैठक में डिपो प्रधान अमित कुमार और सचिव कृष्ण गुलियाना ने कर्मचारियों की समस्याओं को जोर-शोर से उठाया। कर्मचारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे और सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे।

बसों की कमी: जनता और कर्मचारी दोनों परेशान

हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत सरकारी बसों की घटती संख्या है। यूनियन नेताओं ने बताया कि 1993 में जब प्रदेश की आबादी एक करोड़ थी, तब रोडवेज के पास 3,884 बसें और 23,600 कर्मचारी थे। लेकिन आज, जब आबादी तीन करोड़ के करीब है, बसों की संख्या घटकर मात्र 2,400 रह गई है। इस कमी से न केवल कर्मचारियों का काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम जनता को भी परिवहन सुविधाओं में दिक्कत हो रही है। कर्मचारियों ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द नई बसों की खरीद करे और रोडवेज को मजबूत करे।

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निजीकरण का डर: कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में

रोडवेज कर्मचारियों को निजीकरण की आशंका भी सता रही है। यूनियन का आरोप है कि सरकार रोडवेज को कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से उनकी नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और जनता को सस्ती परिवहन सुविधा भी नहीं मिलेगी। यूनियन ने सरकार से साफ तौर पर कहा है कि निजीकरण की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अन्य मांगें: भर्ती, भुगतान और नियमितीकरण

कर्मचारियों ने बसों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ कई अन्य मांगें भी रखी हैं। वे नई भर्तियों की मांग कर रहे हैं ताकि कर्मचारियों की कमी को पूरा किया जा सके। इसके अलावा, रात्रि ठहराव के लंबित भुगतानों को जल्द से जल्द देने की मांग भी उठाई गई है। अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी कर्मचारियों के लिए अहम है। यूनियन नेताओं का कहना है कि ये मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि रोडवेज की बेहतरी और जनता की सुविधा के लिए भी जरूरी हैं।

सरकार के सामने चुनौती

हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की यह भूख हड़ताल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है, जिसका असर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि वे अपनी मांगों पर अडिग हैं और पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर, सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

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क्या होगा असर?

21 और 22 अप्रैल को होने वाली इस भूख हड़ताल से हरियाणा रोडवेज की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। यात्रियों को पहले से अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए। अगर आप इस हड़ताल और इसके असर के बारे में ताजा जानकारी चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट पर बने रहें। हम आपको हर अपडेट सबसे पहले देंगे।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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