Haryana School Holidays 2025, सिटी रिपोर्टर | हरियाणा : हरियाणा में मानसून की भारी बारिश ने हड़कंप मचा दिया है। लगातार बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जिसके चलते प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी की घोषणा कर दी है। सड़कों, पार्कों और खेतों में पानी भर गया है, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की चेतावनी दी है। आइए, जानते हैं इस बारिश के असर और प्रशासन की तैयारियों की पूरी जानकारी।
बारिश से बिगड़े हालात
पिछले कुछ दिनों से हरियाणा के कई हिस्सों में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। सोनीपत, रोहतक, हिसार और अंबाला जैसे जिलों में खेतों और कॉलोनियों में 2 से 4 फीट तक पानी जमा हो गया है। सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ है, और कई जगहों पर पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है, जिसके चलते प्रशासन ने येलो अलर्ट जारी किया है।
स्कूलों में छुट्टी
लगातार बारिश और जलभराव को देखते हुए हरियाणा के शिक्षा विभाग ने 3 सितंबर 2025 को सभी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की है। खासकर उन इलाकों में, जहां जलभराव और बाढ़ का खतरा है, बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। हिसार में 35 स्कूलों में पानी भर गया है, और अंबाला की कॉलोनियों में भी स्कूल जाने वाले रास्ते बंद हैं। प्रशासन ने अभिभावकों से बच्चों को घर पर रखने की अपील की है।
प्रशासन की तैयारियां
हरियाणा के जिला प्रशासनों ने बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए कमर कस ली है। सोनीपत में हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए 3.5 लाख क्यूसेक पानी के बाद यमुना किनारे 50 से ज्यादा गांवों में अलर्ट जारी है। रोहतक और अंबाला में बाढ़ निगरानी कक्ष स्थापित किए गए हैं, और सुपर सकर मशीनों से नालों की सफाई शुरू हो रही है। हिसार में ड्रेन टूटने से 500 एकड़ खेत डूब गए, जिसके लिए टीमें मरम्मत में जुटी हैं। कैबिनेट मंत्रियों और डीसी ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की है।
किसानों और ग्रामीणों की चिंता
बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हिसार में स्वीट कॉर्न, धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। रोहतक के 11 गांवों में खेतों में 3-4 फीट पानी जमा है, और अंबाला की 6 कॉलोनियों में गाद ने नाले जाम कर दिए। कई गांवों में घरों में दरारें पड़ गई हैं, और लोग अपने पशुओं को सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे हैं। प्रशासन ने क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला है, जिसमें हजारों किसानों ने नुकसान दर्ज करवाया है।












