जींद और सोनीपत के दैनिक रेल यात्रियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन अब पटरियों पर पूरी रफ्तार से दौड़ने के लिए तैयार हो चुकी है। सोमवार से रेलवे इस अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली ट्रेन को जींद-सोनीपत रेलवे ट्रैक पर उतार रहा है। इस पूरे सप्ताह यह ट्रेन इसी रूट पर दिन में दो से तीन चक्कर लगाएगी, जिसे अंतिम ट्रायल के तौर पर देखा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से हरियाणा के यात्रियों को धुएं और शोर से मुक्त यात्रा का सीधा फायदा मिलेगा।
पांडू पिंडारा से ललित खेड़ा तक हुआ सफल परीक्षण
इस ऐतिहासिक शुरुआत से पहले रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा और तकनीक की गहन जांच की है। लखनऊ से आई अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) की विशेष टीम ने 25 से 28 फरवरी तक इस हाइड्रोजन ट्रेन का कड़ा रनिंग ट्रायल किया था। परीक्षण के शुरुआती चरण में ट्रेन को पहले एक डीजल इंजन की मदद से जींद से पांडू पिंडारा स्टेशन तक लाया गया।
इसके बाद पांडू पिंडारा से ललित खेड़ा के बीच असली हाइड्रोजन इंजन का इस्तेमाल करते हुए इसका रनिंग ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अधिकारियों ने इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दोनों स्टेशनों के बीच ट्रेन को दो बार दौड़ाकर इसके इंजन की ताकत और ब्रेकिंग सिस्टम को बारीकी से परखा। दिल्ली के शकूरबस्ती में जरूरी मेंटेनेंस का काम पूरा होने के बाद बीते शनिवार को ही यह ट्रेन वापस जींद लौट आई है।
मेट्रो जैसी सुविधाएं और बिना आवाज का सफर
यह ट्रेन तकनीकी मोर्चे पर कई शानदार खूबियों से लैस है जो इसे पारंपरिक डीजल ट्रेनों से बिल्कुल अलग और खास बनाती है। रेलवे के मुताबिक, यह ट्रेन इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में 10 गुना ज्यादा दूरी तय करने की क्षमता रखती है और 360 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस की खपत में 180 किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा कर लेगी। इसके दोनों छोर पर शक्तिशाली पावर इंजन लगाए गए हैं, जिससे ट्रेन को मोड़ने या इंजन बदलने की लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा।
आम आदमी के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन का सफर किसी वातानुकूलित मेट्रो ट्रेन से कम नहीं होगा। यह ट्रेन पटरियों पर पूरी तरह से बिना आवाज किए चलेगी, जिससे यात्रियों को एक बेहद शांत और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा। सफर के दौरान हर कोच में यात्रियों को एसी, आधुनिक लाइटें और पंखों की बेहतरीन सुविधा दी जा रही है।
ऑटोमैटिक दरवाजे और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा
इस हाइड्रोजन ट्रेन का अंदरूनी ढांचा पूरी तरह से नई तकनीक पर आधारित है। मेट्रो ट्रेनों की तर्ज पर ही इसके हर कोच में प्रवेश और निकासी के लिए दोनों तरफ दो-दो ऑटोमैटिक दरवाजे लगाए गए हैं। इसके अलावा यात्रियों को अगले स्टेशन की जानकारी देने के लिए हर कोच के अंदर डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन भी काम करेंगी।
आधिकारिक उद्घाटन से पहले जींद-सोनीपत ट्रैक पर होने वाला यह संचालन देश में ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है। यह पर्यावरण के अनुकूल ट्रेन आने वाले समय में भारी प्रदूषण फैलाने वाले डीजल इंजनों का सबसे मजबूत विकल्प साबित होगी। इससे न केवल देश के पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि दैनिक यात्रियों के सफर करने के तरीके में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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