करनाल. हरियाणा के करनाल जिले में एक ऐसी शादी संपन्न हुई जिसने समाज के सामने दहेज मुक्त विवाह की एक शानदार मिसाल पेश की है। अक्सर शादियों में भारी भरकम लेन देन की खबरें आती हैं लेकिन यहाँ नजारा बिल्कुल उल्टा था।
दूल्हे अंकित ने वधु पक्ष द्वारा दिए गए लाखों रुपये के नकद और कीमती फर्नीचर को लेने से साफ इनकार कर दिया। अंकित ने शगुन की बड़ी धनराशि में से केवल 500 रुपये का एक नोट स्वीकार किया और बाकी सब ससम्मान वापस लौटा दिया।
यह घटना 5 फरवरी 2026 की है जब उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले अंकित करनाल के घरौंडा में बारात लेकर पहुंचे थे। इस सादगी भरे फैसले ने शादी में आए मेहमानों और रिश्तेदारों का दिल जीत लिया।
6 लाख रुपये और फर्नीचर लेने से किया मना
शादी की रस्में पूरे विधि विधान के साथ चल रही थीं। जब विवाह के दौरान परंपरा के अनुसार दुल्हन आरती के परिजनों ने उपहार स्वरूप 6 लाख रुपये नकद और घर का कीमती फर्नीचर दूल्हे को भेंट करना चाहा तो अंकित ने हाथ जोड़ लिए। अंकित का मानना है कि शादी दो आत्माओं और दो परिवारों का मिलन है जिसे रुपयों से नहीं तौला जाना चाहिए।
अंकित का प्रोफेशन: अंकित पंचकूला की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता सहारनपुर में फीड सप्लाई का व्यवसाय करते हैं और परिवार पहले से ही संपन्न है।
सिर्फ 500 रुपये का शगुन: 500 की गड्डियों में से अंकित ने केवल एक नोट निकाला और उसे ही अपना असली शगुन माना।
ससुर बोले: रिश्ता तय होते ही रखी थी शर्त
दुल्हन आरती के पिता ने बताया कि जब यह रिश्ता तय हुआ था तभी अंकित और उनके परिवार ने एक शर्त रखी थी कि वे किसी भी तरह का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे।
हालांकि लड़की के परिजनों ने अपनी खुशी से उपहार देने की कोशिश की लेकिन दूल्हा अपनी बात पर अड़ा रहा। अंकित के माता पिता ने भी बेटे के इस फैसले का पूरा समर्थन किया और घर के लिए आए फर्नीचर के सामान को वापस भिजवा दिया।
आजकल के दौर में जहाँ शादियों में दिखावा और फिजूलखर्ची बढ़ रही है वहीं दहेज प्रथा के विरुद्ध यह कदम युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने इस फैसले की जमकर तारीफ की और कहा कि समाज को ऐसे ही जागरूक दूल्हों की जरूरत है।
समाज पर प्रभाव और विशेषज्ञों की राय
सामाजिक जानकारों का कहना है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहाँ दहेज एक बड़ी सामाजिक बुराई बनी हुई है वहाँ इस तरह की खबरें सकारात्मक बदलाव का संकेत देती हैं।
बेटियों का सम्मान: जब दूल्हा खुद दहेज के खिलाफ खड़ा होता है तो इससे दुल्हन को ससुराल में अधिक सम्मान मिलता है।
आर्थिक बोझ से मुक्ति: वधु पक्ष पर शादी के खर्चों का दबाव कम होता है जिससे समाज में समानता बढ़ती है।
युवाओं के लिए संदेश: अंकित जैसे युवा यह साबित कर रहे हैं कि मेहनत और काबिलियत के दम पर जीवन बसाना ही असली सफलता है।
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