Mock drill in Haryana Simulation of war alertness and emergency preparedness: हरियाणा के 11 जिलों में 7 मई 2025 को सायरन की गूंज और अंधेरे की छाया के बीच युद्ध जैसी स्थिति का अभ्यास किया गया। यह कोई वास्तविक हमला नहीं, बल्कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ी सतर्कता के तहत आयोजित सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल थी।
इस अभ्यास का उद्देश्य हवाई हमले या युद्ध जैसी आपात स्थितियों में नागरिकों, प्रशासन और सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखना था। आइए, जानते हैं इस मॉक ड्रिल की पूरी कहानी और इसका महत्व।
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का पृष्ठभूमि Mock drill in Haryana
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया, जिसमें 26 लोगों की जान गई। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और चार सहयोगी मारे गए।
पाकिस्तान की जवाबी धमकी के बाद भारत ने सीमावर्ती राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी। हरियाणा, जो पंजाब और राजस्थान के जरिए पाकिस्तान सीमा से सटा है, में यह मॉक ड्रिल विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।
11 जिलों में मॉक ड्रिल का आयोजन
हरियाणा के अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर और झज्जर में यह अभ्यास किया गया। सायरन, ब्लैकआउट और निकासी अभ्यास के साथ युद्धकालीन परिस्थितियों का अनुकरण हुआ।
अतिरिक्त गृह मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं, जो आपातकालीन सूचनाओं का समन्वय करेंगे। इस दौरान प्रशासन, पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग ने शानदार तालमेल दिखाया।
जिलों में मॉक ड्रिल की गतिविधियां
पानीपत में जिला सचिवालय, इंडियन ऑयल रिफाइनरी और थर्मल पावर स्टेशन में मॉक ड्रिल हुई। शाम 7:30 से 7:40 बजे तक 10 मिनट का ब्लैकआउट रहा। करनाल में लघु सचिवालय और नेहरू मार्केट में सायरन के साथ अभ्यास हुआ। झज्जर में फायरिंग और आग की स्थिति का अनुकरण किया गया, जहां फायर ब्रिगेड ने तुरंत कार्रवाई की।
सोनीपत के कच्चे क्वार्टर बाजार में निकासी और आग बुझाने का अभ्यास हुआ। हिसार, कुरुक्षेत्र, सिरसा और यमुनानगर में भी सायरन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपातकालीन प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया गया। कनीना में उपमंडल अधिकारी कार्यालय में प्रशिक्षण सत्र आयोजित हुआ, जहां नागरिकों को सायरन की पहचान और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई।
नागरिकों की भूमिका और अपील
प्रशासन ने नागरिकों से मॉक ड्रिल के दौरान शांति बनाए रखने और सायरन सुनकर घबराने की बजाय निर्देशों का पालन करने की अपील की।
नागरिकों को बिजली बंद करने, आपातकालीन किट (टॉर्च, पानी, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री) तैयार रखने और अफवाहों से बचने की सलाह दी गई। यह अभ्यास न केवल सुरक्षा बलों की तैयारी को मजबूत करता है, बल्कि नागरिकों में जागरूकता भी बढ़ाता है।
मॉक ड्रिल का महत्व
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित यह मॉक ड्रिल भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हरियाणा जैसे सीमावर्ती राज्य में ऐसी तैयारियां आपात स्थिति में जान-माल की रक्षा कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास से प्रशासन और नागरिकों का तालमेल मजबूत होता है, जो किसी भी संकट में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष
हरियाणा की इस मॉक ड्रिल ने न केवल सुरक्षा बलों की तत्परता को प्रदर्शित किया, बल्कि नागरिकों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जागरूक भी किया।
यह अभ्यास देश की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नागरिकों से अपील है कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें और किसी भी अफवाह से बचें।











