ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Mullana News: मुलाना का सरकपुर का स्टेडियम बना जंगल, खिलाड़ियों का सपना टूटा, सुविधाएं गायब!

On: अगस्त 30, 2025 12:41 अपराह्न
Follow Us:
Mullana News: मुलाना का सरकपुर का स्टेडियम बना जंगल, खिलाड़ियों का सपना टूटा, सुविधाएं गायब!
Join WhatsApp Group

Mullana Sarkpur stadium, मुलाना (अंबाला) : ग्रामीण क्षेत्र से खेल प्रतिभाओं को तराशने का सपना टूट गया है। गांव सरकपुर में बनाया गया राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर की हालत ऐसी है कि शायद ही कोई इस स्टेडियम में आता हो। अब तो यहां जंगल जैसे हालात हैं और बिल्डिंग भी जर्जर हो रही है।

यही नहीं करोड़ों की लागत से बना यह स्टेडियम अब अपनी हालत पर रो रहा है। खेल विभाग ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि न ही इसके रखरखाव के लिए फंड मिला और न ही स्टाफ। यही कारण है कि यह आज बंद है और इस ओर खिलाड़ियों का कोई रुझान नहीं है।

यही नहीं इस खेल स्टेडियम में प्रशिक्षक तक तैनात नहीं हैं, जबकि बिना स्टाफ के यहां पर व्यवस्थाएं दम तोड़ चुकी हैं। अब खेल विभाग इस ओर कब ध्यान देगा पता नहीं, लेकिन ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रैक्टिस के लिए या तो कोई दूसरी जगह तलाशनी पड़ रही है या फिर अंबाला कैंट का रुख करना पड़ता है।

आठ एकड़ भूमि में बना स्टेडियम

हिसार के आर्यनगर गांव में लव मैरिज बैन, पंचायत का ऐलान- गांव में शादी की तो होगा सामाजिक बहिष्कार | hisar-aryanagar-panchayat-bans-love-marriage-social-boycott
हिसार के आर्यनगर गांव में लव मैरिज बैन, पंचायत का ऐलान- गांव में शादी की तो होगा सामाजिक बहिष्कार

सरकपुर गांव में बना यह खेल स्टेडियम करीब आठ एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसका शुभारंभ दो दिसम्बर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया था। हरियाणा ग्रामीण विकास फंड (एचआरडीएफ) की अनुदान राशि से इस परिसर का निर्माण किया था।

उद्घाटन के समय इसे क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी सौगात बताया था लेकिन महज कुछ सालों में ही यह लापरवाही और अनदेखी का शिकार हो गया। आज इसकी हालत ऐसी है कि लगता है कि महीनों से यहां पर कोई नहीं आया।

खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा कोच

स्टेडियम में अब खेल कोच ही नहीं है। कोच की अनुपस्थिति के कारण यहां खेल गतिविधियां नियमित रूप से नहीं हो पा रहीं। स्थानीय खिलाड़ियों को मार्गदर्शन और ट्रेनिंग के लिए अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है। फिलहाल रखरखाव के लिए एक युवक नियुक्त है, लेकिन वह भी स्थानीय नहीं है।

मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल फिर खुला: हरियाणा सरकार ने दोबारा शुरू किया फसल पंजीकरण, जानें प्रक्रिया | meri-fasal-mera-byora-portal-reopens-kharif-registration-haryana-farmers
मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल फिर खुला: हरियाणा सरकार ने दोबारा शुरू किया फसल पंजीकरण, जानें प्रक्रिया

सरपंच ने कहा- स्थानीय कर्मी रखा जाए

गांव के सरपंच सुशील सैनी ने बताया स्टेडियम की देखरेख के लिए स्थानीय कर्मचारी होना चाहिए। यदि यहां गांव से ही किसी को जिम्मेदारी दी जाए तो खिलाड़ियों को हमेशा स्टेडियम का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाहरी व्यक्ति होने के कारण स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए सुविधाजनक नहीं है। सरपंच ने सरकार और खेल विभाग से इस ओर ध्यान देने की अपील की है।

खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटका

ग्रामीण खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम की हालत सुधरे तो गांव से कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर सकते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा दम तोड़ रही है। टूटी खिड़कियां, बंद कमरों, खराब वाटर कूलर और फैली हुई घास स्टेडियम की दुर्दशा को बयां करती है।

हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा संकट: 8 मेडिकल कॉलेजों में 2572 डॉक्टरों के पद खाली, मरीज परेशान | haryana-medical-colleges-doctor-shortage-vacancies-assembly-data
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा संकट: 8 मेडिकल कॉलेजों में 2572 डॉक्टरों के पद खाली, मरीज परेशान

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द स्टेडियम का रख-रखाव कराया जाए, खेल कोच की नियुक्ति की जाए और खिलाड़ियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि इस स्टेडियम को उसके असली उद्देश्य के लिए जिंदा किया जा सके।

एक भी खेल नर्सरी नहीं

इस स्टेडियम में खेल विभाग की एक भी नर्सरी नहीं चल रही है। हालांकि खेल विभाग ने नर्सरी चलाने के लिए कोच को भेजा लेकिन यहां की व्यवस्थाएं ऐसी थीं कि बात नहीं बनी। यहां पर अव्यवस्थाएं देखकर विभाग ने भी कोच को वापस बुला लिया।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment