Negligence of play school in Faridabad, children given stale food and expired drinks: फरीदाबाद के पल्ला क्षेत्र में एक प्ले स्कूल में बच्चों के साथ हुई घोर लापरवाही ने सभी को हैरान कर दिया। स्कूल में बच्चों को बासी खाना और एक्सपायरी पेय पदार्थ दिए जा रहे थे। बाल कल्याण समिति के निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद स्कूल को सील कर दिया गया। संचालक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, और जिला उपायुक्त (डीसी) ने जांच की पूरी रिपोर्ट मांगी है। यह घटना बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी और इसके प्रभाव को समझते हैं।
बच्चे की मौत ने खोली पोल Negligence of play school
पल्ला क्षेत्र की सरस्वती कॉलोनी में स्थित इस प्ले स्कूल का मामला तब सुर्खियों में आया, जब कुछ समय पहले एक बच्चे नितीश की स्कूल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि स्कूल संचालक पंकज मृत बच्चे के पिता से बकाया फीस मांगने मोर्चरी तक पहुंच गया। इस घटना के बाद बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने गुरुवार को स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में जो हालात सामने आए, वे किसी को भी झकझोर देने वाले थे।
स्कूल में भयावह स्थिति
निरीक्षण के दौरान टीम को स्कूल के तीन छोटे कमरों में 72 बच्चे मिले, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार स्कूल में 103 बच्चे दर्ज थे। यह संख्या स्कूल के क्षेत्रफल के हिसाब से बेहद ज्यादा थी। संचालक पंकज कोई मान्यता संबंधी दस्तावेज नहीं दिखा सका। स्कूल की हालत बदतर थी—स्वच्छता का स्तर शून्य, कोई सुरक्षा उपकरण नहीं, और बच्चों को बासी खाना और एक्सपायरी पेय पदार्थ दिए जा रहे थे। रसोई में बासी गूंथा आटा और खराब खाना मिला। एक कमरे में 34 बच्चे सोते हुए मिले, जिन्हें देखकर शक हुआ कि उन्हें कुछ खिलाकर या पिलाकर सुलाया गया था।
बच्चों के साथ मारपीट और स्वास्थ्य खतरे
निरीक्षण में और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए। एक बच्चे ने बताया कि स्कूल में बच्चों के साथ मारपीट की जाती थी। एक बच्चे की तबीयत इतनी खराब थी कि उसे तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा। कई बच्चों की हालत ठीक नहीं थी, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती करने की सलाह दी गई। स्कूल में 16 से 18 बच्चे 24 घंटे रहते थे, जो उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा था। संचालक ने निरीक्षण में बाधा डालने की कोशिश की और टीम को जबरन रोकने का प्रयास किया।
प्रशासन की सख्ती: स्कूल सील, जांच तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम शिखा और जिला बाल संरक्षण अधिकारी गरिमा सिंह तोमर मौके पर पहुंचीं। स्कूल को तुरंत सील कर दिया गया, और संचालक के खिलाफ पल्ला थाना में केस दर्ज किया गया। डीसी विक्रम सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया और महिला एवं बाल विकास विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा और प्राथमिक शिक्षा से जुड़े मामलों में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। विभाग को सभी प्ले स्कूलों की जांच करने और नियम तोड़ने वालों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया।
अभिभावकों के लिए सुझाव
यह घटना हर अभिभावक के लिए एक चेतावनी है। अपने बच्चे को किसी प्ले स्कूल में भेजने से पहले उसकी मान्यता, सुरक्षा व्यवस्था, और स्वच्छता की जांच करें। स्कूल में खाने-पीने की गुणवत्ता और बच्चों के साथ व्यवहार पर नजर रखें। अगर आपको कोई अनियमितता दिखे, तो तुरंत बाल कल्याण समिति या स्थानीय प्रशासन से शिकायत करें। बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से समझौता न करें।
फरीदाबाद का यह मामला बच्चों की सुरक्षा, प्ले स्कूलों की जवाबदेही, और प्रशासनिक सख्ती जैसे मुद्दों को उजागर करता है। यह खबर उन अभिभावकों के लिए जरूरी है जो अपने बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चाहते हैं।












