करनाल, (Pink Toilet Karnal): महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे तो बहुत सुनने को मिलते हैं, लेकिन शहर की सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है। शहर के 10 से ज्यादा प्रमुख बाजारों में हर रोज हजारों महिलाएं खरीदारी और कामकाज के लिए आती हैं, मगर उनके लिए पिंक टॉयलेट की संख्या नाकाफी है। पूरे शहर में महज तीन पिंक टॉयलेट हैं। इनमें से एक में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन में नैपकिन तक नहीं है। बाजारों से इन शौचालयों तक पहुंचने के लिए 500 मीटर से लेकर 2 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है।
कहां हैं पिंक टॉयलेट?
शहर के बड़े बाजारों में सेक्टर-13 मार्केट, कुंजपुरा रोड, कर्ण गेट मार्केट, सर्राफा बाजार, सदर बाजार, चार चमन, टिंबर मार्केट, सब्जी मंडी और नई सब्जी मंडी शामिल हैं। लेकिन पिंक टॉयलेट सिर्फ रेलवे रोड, नेहरू पैलेस मार्केट और आईटीआई चौक पर हैं। भीड़भाड़ वाले इन बाजारों में अभी तक पिंक टॉयलेट नहीं बने हैं।
रेलवे रोड पर बना शीरो रूम
नगर निगम ने हाल ही में रेलवे रोड पर एक शीरो रूम बनाया है। यहां महिलाओं के बैठने, बच्चों को दूध पिलाने और सेनेटरी हाइजीन की सुविधा है। लेकिन ये सुविधा सिर्फ एक जगह तक सीमित है। हर बाजार में सुलभ शौचालय तो हैं, मगर शहर की महिलाएं और दुकानदार कहते हैं कि हर बड़े बाजार में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। इससे महिलाएं सुरक्षित और सहज महसूस करेंगी।
स्वच्छ भारत मिशन की भावना पर सवाल
बाजारों में खरीदारी करने आईं रेनू, स्वाति और अंजलि ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन और महिला सुरक्षा के अभियानों के बावजूद बाजारों में पर्याप्त पिंक टॉयलेट न होना योजना के अमल पर सवाल उठाता है। नगर निगम को हर भीड़भाड़ वाले इलाके में नए पिंक टॉयलेट और शीरो रूम बनाने चाहिए। पिंक टॉयलेट सिर्फ सुविधा नहीं, महिलाओं की जरूरत हैं। कर्ण गेट बाजार प्रधान संकल्प भंडारी और गुड मंडी के अमित खुराना ने भी यही कहा कि हर बाजार में पिंक शौचालय बनें तो महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
नगर निगम का जवाब
ज्यादातर बाजारों में शौचालय हैं और शहर में तीन पिंक टॉयलेट भी हैं, सभी में अच्छी सुविधाएं हैं। अगर कहीं कमी है तो जल्द सुधार कर दिया जाएगा। इसके अलावा शहर में इंस्पिरेशनल टॉयलेट बनाने का प्रोजेक्ट चल रहा है। ये शौचालय बेहतर सुविधाओं से लैस होंगे। अशोक कुमार, अपर निगमायुक्त












