Punjab and Haryana High Court Jawan dies at home due to serious illness, family will not get ex-gratia: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि अर्धसैनिक बल के जवान की गंभीर बीमारी के कारण घर पर मृत्यु होती है, तो उनका परिवार अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) का हकदार नहीं होगा। यह निर्णय गुरुग्राम निवासी शारदा देवी की याचिका को खारिज करते हुए दिया गया, जिनके पति, एक सीआरपीएफ जवान, की सेरेब्रल मलेरिया से मृत्यु हो गई थी। यह फैसला अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे की नीतियों को समझने में अहम है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी और इसके निहितार्थों को जानें।
मामला क्या है?
शारदा देवी के पति 30 अगस्त 1990 को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में भर्ती हुए थे। बाद में उनकी पदोन्नति हुई और उनकी तैनाती त्रिपुरा की 55वीं बटालियन में हुई। अगस्त 2011 में उनकी पोस्टिंग महाराष्ट्र के नांदेड़ में थी। उसी दौरान वे छुट्टी पर अपने गुरुग्राम स्थित घर आए। यहां उनकी तबीयत बिगड़ी और सेरेब्रल मलेरिया के कारण 27 अगस्त 2011 को उनकी मृत्यु हो गई। शारदा देवी ने दावा किया कि उनके पति की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई, इसलिए उन्हें अनुग्रह राशि मिलनी चाहिए। सीआरपीएफ ने उनके दावे को खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट का फैसला Punjab and Haryana High Court
सितंबर 2024 में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शारदा देवी की याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ उन्होंने खंडपीठ में अपील की, जिसमें उन्होंने 11 सितंबर 1998 के सरकारी आदेश का हवाला दिया। इस आदेश के अनुसार, ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मृत्यु पर 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मृत्यु न तो दुर्घटना, न आतंकवादी हमले, न युद्ध, और न ही सीमा पर सैन्य कार्रवाई के कारण हुई। कोर्ट ने कहा कि सेरेब्रल मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो सरकारी दिशा-निर्देशों में मुआवजे की श्रेणी में नहीं आती। इसलिए, शारदा देवी अनुग्रह राशि की हकदार नहीं हैं।
फैसले का महत्व
यह फैसला अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे की नीतियों को स्पष्ट करता है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि अनुग्रह राशि केवल विशिष्ट परिस्थितियों, जैसे दुर्घटना, युद्ध, या आतंकवादी हमले में मृत्यु पर ही दी जाती है। गंभीर बीमारी से घर पर हुई मृत्यु इस दायरे में नहीं आती। यह निर्णय उन परिवारों के लिए एक सबक है, जो मुआवजे के नियमों को पूरी तरह समझे बिना दावे करते हैं।
परिवारों के लिए सुझाव
अगर आप अर्धसैनिक बल में कार्यरत हैं या आपके परिवार में कोई जवान है, तो अनुग्रह राशि और अन्य मुआवजा नीतियों को अच्छी तरह समझ लें। सीआरपीएफ या संबंधित बल की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध दिशा-निर्देश पढ़ें। किसी भी दावे से पहले अपने मामले को वकील से जांच लें, ताकि आपकी याचिका सही आधार पर हो। साथ ही, जवानों को अपनी स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से करानी चाहिए, खासकर ऐसी जगहों पर तैनाती के दौरान जहां मलेरिया जैसे रोगों का खतरा हो। अपने परिवार को भी इन नीतियों के बारे में जागरूक करें।
समाज के लिए सबक
यह मामला हमें स्वास्थ्य जागरूकता और मुआवजा नीतियों की समझ की अहमियत सिखाता है। सेरेब्रल मलेरिया जैसी बीमारियां समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती हैं। समाज को जवानों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है। साथ ही, सरकार को मुआवजा नीतियों को और स्पष्ट और सुलभ बनाने पर विचार करना चाहिए।
हाईकोर्ट का यह फैसला अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे की सीमाओं को रेखांकित करता है। यह खबर उन लोगों के लिए जरूरी है, जो सीआरपीएफ या अन्य बलों में कार्यरत हैं या उनके परिवार से जुड़े हैं। यह हमें नीतियों को समझने और स्वास्थ्य सावधानियों की अहमियत बताता है।












