रेवाड़ी . हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में रेवाड़ी जिले के आकेड़ा और घटाल महानियावास गांव के लोगों को बड़ी राहत मिली है। इन दोनों गांवों को आपस में मर्ज कर अब ‘महाग्राम योजना’ में शामिल किया जाएगा। विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने इसका ऐलान करते हुए बताया कि इस तकनीकी विलय के बाद दोनों गांवों में जलभराव की समस्या खत्म करने के लिए 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से सीवर लाइन बिछाई जाएगी।
रेवाड़ी से बीजेपी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव की विशेष मांग पर विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने सदन में इसका आधिकारिक ऐलान किया। सरकार के इस फैसले से राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से सटे इन इलाकों के हजारों निवासियों को नरकीय जीवन से सीधी मुक्ति मिलेगी।
भिवाड़ी से सटे गांवों में आबादी का भारी दबाव
विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने विधानसभा में अपने इलाके की जमीनी हकीकत बयां करते हुए स्पष्ट किया कि आकेड़ा और घटाल महानियावास में कई नई कॉलोनियां बस चुकी हैं जो आपस में पूरी तरह जुड़ी हुई हैं। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र का बॉर्डर होने के कारण यहां फैक्ट्रियों में काम करने वाले कामगारों और किरायेदारों की भारी भीड़ रहती है।
आधिकारिक आंकड़ों से इतर इन दोनों गांवों की वास्तविक संयुक्त आबादी 12 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। अगर यहां रहने वाले किरायेदारों की संख्या को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 25 हजार के करीब पहुंच जाता है। आबादी के इसी भारी दबाव के कारण इन गांवों में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका था और जल निकासी एक गंभीर संकट बन गई थी।
3 करोड़ की लागत से बिछेगी सीवर लाइन
विधायक ने मांग रखी कि इस क्षेत्र को महानगर घोषित किया जाए और समस्या सुलझाने वाली संयुक्त कमेटी में एडीसी व जिला परिषद सीईओ के साथ जिला उपायुक्त (DC) को भी शामिल किया जाए। पंचायत विभाग पहले ही इन दोनों गांवों में गंदे पानी की निकासी और सीवर लाइन के लिए 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रपोजल तैयार कर चुका है। अब इस नई घोषणा के बाद धरातल पर सीवर लाइन बिछाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
मर्ज होकर पूरी करेंगे महाग्राम योजना की शर्तें
इस मांग पर विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने सदन को तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में आकेड़ा की जनसंख्या 514 और घटाल महानियावास की आबादी 4,629 दर्ज है। इसके अलावा दोनों पंचायतों के पास अपनी कोई ग्राम पंचायत की भूमि भी उपलब्ध नहीं है।
सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी गांव में सीवर लाइन बिछाने के लिए उसकी आबादी 10 हजार से अधिक होनी चाहिए और उसे महाग्राम योजना में शामिल होना चाहिए। इन्ही तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने दोनों गांवों को मर्ज (एक साथ मिलाने) का फैसला लिया है। अब इन्हें संयुक्त रूप से महाग्राम योजना में शामिल कर सीवर लाइन डालने का काम तुरंत प्रभाव से शुरू किया जाएगा।
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