हरियाणा में विधानसभा चुनाव अगस्त-सितंबर में संभव, सभी पर्टियां तैयारियों में जुटी

चंडीगढ़। हरियाणा में एक बार फिर ऐसा हुआ है कि किसी ऐसे नेता को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया है, जो विधानसभा का सदस्य भी नहीं है। नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र से सांसद हैं। नियमों के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को छह महीनों के लिए मंत्री या मुख्यमंत्री बना सकती है। लेकिन छह महीनों के भीतर संबंधित व्यक्ति को चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना अनिवार्य है।
लोकसभा चुनावों पर नजर
भाजपा ने चूंकि नायब सिंह सैनी को बिना विधायक हुए ही मुख्यमंत्री बना दिया है, ऐसे में विधानसभा के चुनाव भी समय से थोड़ा पहले होने के आसार बन गए हैं। बहरहाल, सभी की नजरें लोकसभा चुनावों पर हैं। पंद्रह मार्च के बाद लोकसभा चुनावों का कभी भी ऐलान हो सकता है।
नायब को बनना होगा विधायक
मुख्यमंत्री बने रहने के लिए नायब सिंह सैनी के लिए यह जरूरी है कि वे छह माह के भीतर विधायक बनकर सदन में पहुंचे। जानकार बताते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी मंत्री (मुख्यमंत्री) जो निरंतर 6 माह की किसी अवधि तक राज्य के विधान-मंडल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।
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चार माह पूर्व 3 नवंबर, 2023 को मौजूदा 14वीं हरियाणा विधानसभा के कार्यकाल के चार साल पूरे हो गए थे। 4 नवंबर, 2019 को प्रदेश की विधानसभा का पहला सत्र बुलाया गया था। संविधान के अनुच्छेद 172 के अनुसार प्रत्येक राज्य की प्रत्येक विधानसभा, यदि पहले ही भंग नहीं कर दी जाती है तो, अपने प्रथम सत्र के लिए नियत तिथि से पांच साल तक बनी रहेगी।
कौन हैं सीएम नायब सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी निवर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ भाजपा संगठन में बतौर कंप्यूटर ऑपरेटर काम कर चुके हैं। मनोहर लाल भाजपा में संगठन मंत्री थे तब वे अपने कार्यालय के कर्मचारियों में सबसे अधिक भरोसा कंप्यूटर ऑपरेटर नायब सिंह पर ही करते थे।
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कई साल तक भाजपा मुख्यालय में काम करने वाले नायब सिंह सैनी ने कुछ समय संगठन की राजनीति को छोड़कर अंबाला जिले के नारायणगढ़ में केबल ऑपरेटर के रूप में भी काम किया।
सैनी के पास 3 पद
हरियाणा की राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी एक व्यक्ति के पास राजनीतिक दल में तीन महत्वपूर्ण पद रहे हो। नायब सिंह सैनी इस समय कुरुक्षेत्र से सांसद हैं। उनका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है।
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इस बीच पार्टी ने पिछले साल 27 अक्तूबर को उन्हें भाजपा हरियाणा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया। इस पद पर काम करते हुए उन्हें छह माह पूरे भी नहीं हुए थे कि उन्हें मुख्यमंत्री का पद दे दिया गया।
राजनीति में ऐसे आए
कुछ समय के अंतराल के बाद वे फिर से भाजपा की सक्रिय राजनीति में लौटे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सैनी को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। 1996 में उन्हें हरियाणा भाजपा के संगठन में जिम्मेदारी दी गई थी। उसके बाद वर्ष 2002 में नायब सैनी अंबाला भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री बने थे।
पहली बारी में बने राज्यमंत्री
2005 में नायब सिंह सैनी भाजपा अंबाला युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्हें भाजपा हरियाणा किसान मोर्चा का प्रदेश महामंत्री भी बनाया गया। साल 2012 में नायब सैनी का प्रमोशन हुआ और उन्हें अंबाला का जिला अध्यक्ष बना दिया गया। 2014 के विधानसभा चुनाव में नायब सिंह सैनी को नारायणगढ़ से टिकट दिया गया और वे जीतकर विधानसभा पहुंच गए। सैनी को मनोहर लाल खट्टर के करीबी होने का भी फायदा मिला। वर्ष 2016 में उन्हें खट्टर के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया।
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