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सावधान! ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना सामान्य नहीं, हो सकती है यह गंभीर बीमारी

On: अप्रैल 5, 2026 3:21 अपराह्न
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सावधान! ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना सामान्य नहीं, हो सकती है यह गंभीर बीमारी
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हेल्थ डेस्क, 05 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। ज्यादातर भारतीय दांत साफ करते समय ब्रश के ब्रिसल्स पर गुलाबी रंग या खून देखकर उसे मामूली समझकर छोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह मसूड़ों की सेहत बिगड़ने का पहला और सबसे स्पष्ट संकेत है। मसूड़ों से रक्तस्राव असल में ‘प्लाक’ के कारण होता है, जो दांतों की रेखा पर जमा होने वाली बैक्टीरिया की एक चिपचिपी परत है। जब हम नियमित सफाई में कोताही बरतते हैं, तो यह परत मसूड़ों में जलन पैदा करती है, जिससे वे लाल होकर सूज जाते हैं और हल्का छूने पर भी खून निकलने लगता है।

जिंजिवाइटिस से पीरियडोंटाइटिस तक का खतरनाक सफर

इस शुरुआती स्थिति को चिकित्सा भाषा में ‘जिंजिवाइटिस’ कहा जाता है। राहत की बात यह है कि सही ढंग से सफाई और डॉक्टरी सलाह से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब लोग इसे नजरअंदाज करते हैं और यह ‘पीरियडोंटाइटिस’ में बदल जाता है। यह एक गहरा संक्रमण है जिसमें बैक्टीरिया दांतों को सहारा देने वाली हड्डियों और ऊतकों पर सीधा हमला करते हैं। इस स्टेज पर पहुँचने के बाद दांतों को होने वाला नुकसान अक्सर स्थायी होता है और दांत गिरने की नौबत आ जाती है।

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भारतीयों में मसूड़ों की बीमारी के पीछे छिपे अन्य कारण

मसूड़ों से खून आने के पीछे सिर्फ सफाई की कमी ही नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और खान-पान भी जिम्मेदार है। भारतीय आहार में अक्सर विटामिन सी और के की कमी देखी जाती है, जो रक्त के थक्के जमने और मसूड़ों की मरम्मत के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाकर मसूड़ों के संक्रमण को बढ़ा देती है। महिलाओं में गर्भावस्था, मासिक धर्म और मेनोपॉज़ के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी मसूड़ों को अधिक संवेदनशील बना देते हैं।

दवाएं और तंबाकू बढ़ा रहे हैं जोखिम

एस्पिरिन और हाई ब्लड प्रेशर जैसी सामान्य दवाएं भी शरीर में रक्तस्राव की प्रवृत्ति को बढ़ा सकती हैं। सबसे घातक प्रभाव तंबाकू का है, चाहे वह सिगरेट के रूप में हो या चबाने वाला गुटखा। तंबाकू मसूड़ों में रक्त के प्रवाह को कम कर देता है, जिससे बीमारी के लक्षण छिप जाते हैं और समस्या तब पता चलती है जब वह गंभीर रूप ले चुकी होती है। अगर मसूड़े दांतों से अलग हो रहे हैं या मुँह से लगातार बदबू आ रही है, तो यह कैंसर या ब्लड डिसऑर्डर जैसे बड़े रोगों का भी संकेत हो सकता है।

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बचाव के लिए क्या करें और कब जाएं डॉक्टर के पास

दांतों की उम्र बढ़ाने के लिए दिन में दो बार सॉफ्ट ब्रश से गोल-गोल घुमाकर सफाई करें। आक्रामक तरीके से रगड़ना मसूड़ों को छील सकता है। डाइट में आंवला, अमरूद और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें ताकि विटामिन की कमी पूरी हो सके। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दर्द होने का इंतजार न करें। अधिकांश भारतीय केवल तभी डेंटिस्ट के पास जाते हैं जब दर्द बर्दाश्त से बाहर होता है, जबकि हर छह महीने में रूटीन चेकअप आपको भविष्य की बड़ी सर्जरी और खर्चों से बचा सकता है।

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह न समझें। किसी भी फिटनेस प्रोग्राम को शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें। डाइट में बदलाव करने से पहले भी अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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