Chhath Puja Health Benefits in hindi: नई दिल्ली: छठ पूजा सिर्फ आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है! जब लोग छठी माता के गीत गाते हुए डूबते और उगते सूरज को अर्घ्य देते हैं, तो यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान का अनोखा मेल है।
यह सदियों पुराना पर्व आयुर्वेद और लोक संस्कृति में ‘जीवन का संतुलन’ माना जाता है। सूर्य की किरणों से मिलने वाली शक्ति हमारे शरीर को विटामिन डी देती है, जो हड्डियों को मजबूत करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक शांति के लिए जरूरी है। इस बार 25 से 28 अक्टूबर 2025 तक मनाए जाने वाले छठ पूजा के सेहत से जुड़े फायदों के बारे में जानिए।
छठ पूजा का पौराणिक महत्व Chhath Puja Health Benefits
छठ पूजा की जड़ें रामायण, महाभारत, विष्णु पुराण, देवीभागवत और ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे ग्रंथों में मिलती हैं। कहते हैं कि महाभारत काल में सूर्य पुत्र कर्ण ने इसकी शुरुआत की थी।
कर्ण हर दिन घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। च्यवन मुनि की पत्नी सुकन्या ने भी इस व्रत से अपने पति को पुनर्यौवन का वरदान दिलाया था। यह पर्व सूर्य और छठी माता की उपासना का प्रतीक है, जो हमें प्रकृति के साथ जोड़ता है।
सूर्य की किरणों का जादू
छठ पूजा में सूर्योदय (सुबह 6-8 बजे) और सूर्यास्त (शाम 4-6 बजे) के समय अर्घ्य देने की परंपरा है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह समय खास है, क्योंकि इस दौरान सूर्य की यूवी-बी किरणें सबसे संतुलित होती हैं।
ये किरणें बिना त्वचा को नुकसान पहुंचाए विटामिन डी का निर्माण करती हैं। जब व्रती बिना किसी केमिकल लोशन के सूर्य की रोशनी में समय बिताते हैं, तो उनका शरीर डिटॉक्स होता है और कैल्शियम-फॉस्फोरस का संतुलन बनता है।
मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए वरदान
आयुर्वेद के अनुसार, सूर्य की किरणें शरीर की पाचन शक्ति को मजबूत करती हैं। छठ व्रत में 36 घंटे का निर्जला उपवास, ध्यान और सूर्य स्नान से एंडोक्राइन सिस्टम संतुलित होता है। इससे मेलाटोनिन और सेरोटोनिन हार्मोन सक्रिय होते हैं, जो नींद को बेहतर करते हैं, मूड को खुशहाल बनाते हैं और मानसिक स्थिरता देते हैं। यह तनाव और डिप्रेशन को कम करने में भी मदद करता है।
विटामिन डी की कमी का समाधान
भारत में विटामिन डी की कमी एक बड़ी समस्या है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी आबादी का 70% हिस्सा इससे प्रभावित है।
साइंस जर्नल नेचर की 2022 की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में करीब 49 करोड़ लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। यह कमी हड्डियों की कमजोरी, थकान, डिप्रेशन और कमजोर इम्यूनिटी का कारण बनती है। छठ पूजा की प्राकृतिक धूप से मिलने वाला विटामिन डी इस कमी को दूर करने का शानदार तरीका है।
प्रकृति और सेहत का अनोखा मेल
छठ पूजा का यह पर्व सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सस्टेनेबल हेल्थ थेरपी भी है। जब लोग घाटों पर सूर्य की ओर मुख करके घंटों खड़े रहते हैं, तो यह एक प्राकृतिक चिकित्सा की तरह काम करता है।
पश्चिमी देश आज ‘सन बाथ’ और ‘हेलियोथेरेपी’ को सेहत के लिए जरूरी मान रहे हैं, जो हजारों साल पहले भारत ने छठ पूजा के रूप में अपनाया था। आयुर्वेद में ‘कटिस्नान’ (कमर तक पानी में स्नान) को भी सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है, जैसा कर्ण करते थे।













