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Devshayani Ekadashi vrat katha: देवशयनी एकादशी व्रत कथा जानें पौराणिक कहानी और पूजा विधि!

On: जुलाई 5, 2025 5:19 अपराह्न
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Devshayani Ekadashi vrat katha: देवशयनी एकादशी व्रत कथा जानें पौराणिक कहानी और पूजा विधि!
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Devshayani Ekadashi vrat katha ashadhi ekadashi vrat katha kahani in Hindi: देवशयनी एकादशी व्रत कथा सुनने का समय आ गया है, क्योंकि 6 जुलाई 2025 को यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख-शांति लाने वाला है! आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहते हैं, भगवान विष्णु की भक्ति का अनमोल अवसर है। इस दिन से चातुर्मास शुरू होता है, जब भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान शुभ कार्यों पर रोक लगती है, लेकिन भक्ति और तप का महत्व बढ़ जाता है। आइए, जानते हैं इस व्रत की पौराणिक कथा, पूजा विधि और इसका महत्व, जो आपके दिल को छू लेगी।

Devshayani Ekadashi vrat katha: चातुर्मास की शुरुआत

देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म में बेहद खास है। यह वह दिन है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं, और चार महीने बाद देवोत्थानी एकादशी पर जागते हैं। इस दौरान विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते, क्योंकि मान्यता है कि भगवान विष्णु की जागृत अवस्था ही शुभ कार्यों के लिए जरूरी है। यह व्रत करने से पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 6 जुलाई 2025 को यह पर्व भक्ति और संयम का संदेश लेकर आ रहा है।

मांधाता की कहानी

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पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा था, जिसके राज्य में प्रजा सुखी थी। लेकिन अचानक तीन साल तक अकाल पड़ा, जिससे हाहाकार मच गया। यज्ञ और धार्मिक कार्य ठप हो गए। प्रजा ने राजा से गुहार लगाई। दुखी मांधाता ने इसका कारण जानने के लिए जंगल में ऋषि अंगिरा के आश्रम का रुख किया। ऋषि ने बताया कि एक शूद्र की तपस्या ने धर्म का उल्लंघन किया, जिससे अकाल आया। लेकिन राजा ने हिंसा का रास्ता छोड़कर दूसरा उपाय मांगा। तब ऋषि ने देवशयनी एकादशी का व्रत सुझाया। राजा और प्रजा ने यह व्रत विधिपूर्वक किया, जिससे बारिश हुई और राज्य फिर से समृद्ध हो गया।

व्रत और पूजा की विधि

देवशयनी एकादशी का व्रत करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं। तुलसी माला से उनका अभिषेक करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। सात्विक भोजन करें और मांस-मदिरा से बचें। इस दिन गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन सही मुहूर्त में करें। भक्ति और श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से आपके सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।

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देवशयनी एकादशी का व्रत

देवशयनी एकादशी का व्रत न सिर्फ आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि जीवन की मुश्किलों को भी आसान बनाता है। यह व्रत सभी वर्णों के लिए फलदायी है। कथा सुनने और व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पापों का नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति में डूबकर आप अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकते हैं। तो, इस 6 जुलाई को व्रत रखें और अपने परिवार के साथ इस कथा को शेयर करें।

देवशयनी एकादशी व्रत कथा 2025 के अनुसार, 6 जुलाई को मनाया जाने वाला यह पवित्र व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। सतयुग के राजा मांधाता की कथा बताती है कि इस व्रत से अकाल जैसे संकट दूर हुए और समृद्धि लौटी। चातुर्मास की शुरुआत का यह दिन भक्ति और संयम का प्रतीक है। तुलसी माला से पूजा और अन्न दान करें। यह व्रत और इसकी पौराणिक कथा आपके जीवन में सुख-शांति लाएगी।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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