Durga Saptashati Path नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि 2025 में माता दुर्गा की भक्ति में डूबने का समय आ गया है। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। यह पवित्र ग्रंथ, जिसे चंडी पाठ भी कहते हैं, माता दुर्गा की महिमा और राक्षसों पर उनकी विजय की गाथा बयां करता है।
मार्कण्डेय पुराण से लिया गया यह ग्रंथ 700 श्लोकों में बंटा है और इसे पढ़ने से सुख-समृद्धि मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका पाठ करने के सही नियम क्या हैं? आइए, जानते हैं दुर्गा सप्तशती पाठ की पूरी विधि और इससे जुड़े खास नियम।
दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम
सही वस्त्र और तैयारी: दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले स्नान करके लाल या पीले वस्त्र पहनें। ये रंग नवरात्रि में शुभ माने जाते हैं। इसके बाद गंगाजल छिड़ककर माता का ध्यान करें।
मंत्र जाप जरूरी: पाठ शुरू करने से पहले ‘ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः’ मंत्र का जाप करें। बिना इस मंत्र के सीधे पाठ शुरू करना उचित नहीं है।
कवच, कीलक और अर्गला का पाठ: किसी भी अध्याय को शुरू करने से पहले कवच, कीलक और अर्गला का पाठ जरूरी है। इनके बिना पाठ का पूरा फल नहीं मिलता। इसके बाद ही 13 अध्यायों का पाठ करें।
पाठ का सही तरीका
दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को एक ही बार में पढ़ने का विधान है। ऐसा करने से माता की कृपा और शुभ फल मिलते हैं। लेकिन अगर समय की कमी है, तो इसे तीन चरित्रों में बांटकर पढ़ सकते हैं: प्रथम चरित्र (पहला अध्याय), मध्यम चरित्र (दूसरा से चौथा अध्याय), और उत्तर चरित्र (पांचवां से 13वां अध्याय)। अगर यह भी संभव न हो, तो नवरात्रि के 9 दिनों में 13 अध्यायों का पाठ करने का संकल्प लें। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है।
पाठ के बाद जरूरी कदम
दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ पूरा करने के बाद क्षमा प्रार्थना और रात्रि सूक्तम का पाठ जरूर करें। नवरात्रि के नौ दिनों में विधिवत पाठ करने से जीवन के हर दुख से मुक्ति मिलती है और मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं। इन नियमों को अपनाकर आप माता की कृपा पा सकते हैं और अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।













