Gut Health Issues solve tips in hindi: आजकल लगभग हर कोई पेट की दिक्कतों से जूझ रहा है। गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और सीने में जलन जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। लेकिन आखिर ये सब क्यों हो रहा है? इस पर हमने फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुरक्षित टी.के. से खास बात की।
डॉ. की राय में बदलती लाइफस्टाइल, देर रात जागना, बेतरतीब खाना और बढ़ता स्ट्रेस इनकी जड़ हैं। लोग अक्सर इन छोटी-मोटी दिक्कतों को इग्नोर कर देते हैं,
लेकिन वक्त पर ध्यान न दिया तो ये बड़े रोगों का सबब बन सकती हैं। चलिए, डॉ. के मुताबिक जानते हैं कि इन आम पेट की परेशानियों को कैसे कंट्रोल करें और सिंपल टिप्स क्या हैं।
दिनचर्या में अचानक बदलाव और पेट की परेशानी Gut Health Issues
डॉ. सुरक्षित के मुताबिक, जब रूटीन अचानक पलट जाती है- जैसे लेट नाइट वेकअप या टाइम पर खाना न खाना- तो बॉडी की बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ जाती है।
इससे पाचन सिस्टम पर सीधा असर पड़ता है। नतीजा? पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, कब्ज, डायरिया या भूख कम लगना जैसी दिक्कतें। अगर ये लंबे समय चले तो सीरियस बीमारियां भी हो सकती हैं।
अनियमित भोजन का पाचन पर असर
डॉ. सुरक्षित बताते हैं कि खाने का टाइम बिगड़ने से पेट ठीक से काम नहीं करता। डाइजेस्टिव जूस और एंजाइम्स फिक्स्ड टाइम पर रिलीज होते हैं। टाइम चेंज होने पर फूड प्रॉपरली डाइजेस्ट नहीं होता, जिससे अपच, गैस, पेट फूलना और एसिडिटी शुरू हो जाती है। लॉन्ग टर्म में ये ओबेसिटी और दूसरी डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स को बुलावा देती है।
पेट की समस्याओं को कम करने के लिए दिनचर्या सुधार
डॉ. कहते हैं कि पेट हेल्दी रखने के लिए रेगुलर रूटीन फॉलो करना सुपर इंपॉर्टेंट है। रोज टाइम पर सोएं-उठें। खाना लाइट, बैलेंस्ड और न्यूट्रिशियस रखें। ढेर सारा पानी पिएं, रेगुलर एक्सरसाइज करें और जंक फूड से दूर रहें। प्लस, मेडिटेशन, योगा और स्ट्रेस-फ्री लाइफ पाचन को फिट रखती है।
तनाव और थकान का पाचन पर असर
डॉ. सुरक्षित टी.के. का मानना है कि स्ट्रेस और थकान पाचन को कमजोर कर देते हैं। स्ट्रेस से हॉर्मोनल इम्बैलेंस होता है, पेट में एसिड बढ़ता है- गैस, दर्द और एसिडिटी हो जाती है। थकान से इंटेस्टाइन की स्पीड स्लो हो जाती, कब्ज-अपच बढ़ता है। मेंटल पीस और एनाफ स्लीप से ये प्रॉब्लम्स काफी कंट्रोल हो सकती हैं।
सही खान-पान और जीवनशैली अपनाना जरूरी
पेट की दिक्कतों से बचने के लिए राइट ईटिंग, रेगुलर रूटीन और स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल अपनाएं। टाइम पर खाएं, जंक कम करें, पानी भरपूर पिएं और लाइट वर्कआउट या योगा रूटीन में ऐड करें। छोटे चेंजेस भी लॉन्ग रन में पेट और डाइजेशन को हेल्दी रखते हैं।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए
डॉ. सुरक्षित एडवाइज देते हैं कि अगर पेट में कंटीन्यूअस दर्द, बार-बार गैस, कब्ज या एसिडिटी हो रही हो, तो फटाफट डॉक्टर से मिलें। टाइमली ट्रीटमेंट से छोटी दिक्कतें बड़े रोगों में नहीं बदलेंगी।
इस तरह, रूटीन और डाइट में छोटे-मोटे सुधार से आप ज्यादातर पेट प्रॉब्लम्स को हैंडल कर सकते हैं। डॉ. सुरक्षित टी.के. की सलाह- रेगुलर रूटीन, बैलेंस्ड डाइट और स्ट्रेस-फ्री लाइफ ही डाइजेशन हेल्थ की की है।
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल में दिए टिप्स सिर्फ जनरल इंफो के लिए हैं, प्रोफेशनल मेडिकल एडवाइस नहीं। कोई फिटनेस प्रोग्राम या डाइट चेंज करने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें।












