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Harchhat Vrat Katha: हरछठ व्रत की कहानी झूठ की सजा और चमत्कार की कथा, जानें ललही छठ की रोचक कहानी

On: August 14, 2025 8:13 AM
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Harchhat Vrat Katha: हरछठ व्रत की कहानी झूठ की सजा और चमत्कार की कथा, जानें ललही छठ की रोचक कहानी
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Harchhat Vrat Katha Hal Chhath Ki Kahani: हरछठ, जिसे ललही छठ या हल षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, की कथा बेहद रोचक और प्रेरणादायक है। प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी, जो जल्द ही मां बनने वाली थी। एक तरफ उसे प्रसव की चिंता सता रही थी, तो दूसरी तरफ वह अपने गोरस यानी दूध-दही के व्यापार को लेकर परेशान थी। उसे डर था कि अगर प्रसव हो गया, तो उसका दूध-दही बेकार हो जाएगा। इस डर से उसने दूध-दही के घड़े सिर पर उठाए और बेचने निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उसने पास की एक झरबेरी की ओट में शरण ली और वहां एक बच्चे को जन्म दिया।

लेकिन ग्वालिन ने अपने नवजात शिशु को वहीं छोड़कर दूध-दही बेचने का फैसला किया। उस दिन हल षष्ठी थी। उसने गाय और भैंस के मिश्रित दूध को सिर्फ भैंस का दूध बताकर गांव वालों को बेच दिया। इस बीच, जिस झरबेरी के नीचे उसने अपने बच्चे को छोड़ा था, वहां पास के खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक किसान के बैल भड़क गए, और हल का फल बच्चे के शरीर में घुस गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

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किसान को इस हादसे का बहुत दुख हुआ। उसने हिम्मत जुटाकर बच्चे के चीरे हुए पेट में झरबेरी के कांटों से टांके लगाए और वहां से चला गया। जब ग्वालिन अपने बच्चे के पास लौटी और उसकी हालत देखी, तो उसे समझते देर न लगी कि यह सब उसके झूठ का फल है। उसने मन ही मन सोचा कि अगर उसने गांव वालों को झूठ न बोला होता और उनका धर्म भ्रष्ट न किया होता, तो उसके बच्चे की ऐसी हालत न होती। ग्वालिन ने प्रायश्चित करने का फैसला किया। उसने गांव में लौटकर अपनी गलती सबके सामने स्वीकार की।

वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसकी सजा के बारे में बताने लगी। गांव की महिलाओं ने उसकी सच्चाई देखकर उसे माफ कर दिया और आशीर्वाद दिया। जब ग्वालिन दोबारा झरबेरी के नीचे पहुंची, तो वह दंग रह गई। उसका बेटा जीवित था! यह देखकर उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान माना और कभी झूठ न बोलने की कसम खाई।

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हरछठ की एक और कथा एक राजा से जुड़ी है। इस राजा ने जल के लिए एक विशाल सागर खुदवाया और घाट बनवाए, लेकिन उसमें पानी नहीं आया। चिंतित राजा ने गांव के पुरोहित से उपाय पूछा। पुरोहित ने बताया कि अगर राजा अपने बड़े बेटे या बेटी की बलि दे दें, तो सागर में पानी आ सकता है। यह सुनकर राजा और चिंतित हो गए। पुरोहित ने सुझाव दिया कि राजा अपनी बहू को यह कहकर मायके भेज दें कि उसकी मां की तबीयत खराब है। राजा ने ऐसा ही किया।

यह सुनकर बहू दुखी हो गई और हरछठ के दिन रोती-पीटती मायके के लिए निकल पड़ी। मायके पहुंचने पर उसकी मां ने उसे परेशान देखकर पूछा, “हम तो ठीक हैं, फिर तुम इस हाल में क्यों आईं?” बहू ने सारी बात बताई। मां ने कहा, “बेटी, सुना है तुम्हारे ससुर ने सागर बनवाया है, जिसमें पानी नहीं आ रहा। इसके लिए किसी की बलि चाहिए। तुम्हारे साथ छल हुआ है, जल्दी लौट जाओ।”

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मां की बात सुनकर बहू तुरंत ससुराल के लिए निकल पड़ी। रास्ते में वह हरछठ माता की मनौती करती रही। जब वह सागर के पास पहुंची, तो देखा कि वह जल से लबालब भरा हुआ है। वहां एक बालक खेल रहा था, जो कोई और नहीं, उसका अपना बेटा था। बहू ने उसे गोद में उठाया और हरछठ माता को धन्यवाद दिया। घर पहुंचने पर उसने देखा कि दरवाजा बंद है। उसने सास-ससुर को सारी बात बताई और कहा, “आज मेरी सच्चाई और हरछठ माता की कृपा से मेरा बेटा जीवित है।” सास-ससुर अपने पोते को जीवित देखकर खुशी से झूम उठे और बहू को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा, “हरछठ माता ने हमारे कुल का दीया जगा दिया।”

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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