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सेहत का बड़ा दुश्मन है एक पल का गुस्सा, आयुर्वेद में छिपे हैं इसे काबू करने के अचूक उपाय

On: फ़रवरी 24, 2026 8:13 पूर्वाह्न
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सेहत का बड़ा दुश्मन है एक पल का गुस्सा, आयुर्वेद में छिपे हैं इसे काबू करने के अचूक उपाय
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Anger Management in Ayurveda: आधुनिक जीवनशैली में गुस्सा आना एक आम बात हो गई है, लेकिन यह कुछ पलों का क्रोध इंसान के दिल और दिमाग पर गहरा दुष्प्रभाव डालता है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों मानते हैं कि बार-बार गुस्सा आने से शरीर की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है।

इंसान अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर देता है कि क्रोध की छोटी सी प्रतिक्रिया गंभीर बीमारियों की नींव रख सकती है। इससे बचने के लिए शारीरिक विज्ञान को समझना और जीवनशैली में छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव करना आवश्यक है।

सेहत पर गुस्से का सीधा प्रहार

जब इंसान क्रोधित होता है, तो उसका शरीर तुरंत ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चला जाता है। इस शारीरिक प्रतिक्रिया के दौरान एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्त्राव तेजी से होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है और हृदय पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

बार-बार इस स्थिति से गुजरने वाले व्यक्ति को आगे चलकर हृदय रोग, सिरदर्द और अनिद्रा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आधुनिक रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करती है कि शरीर में बढ़ता स्ट्रेस हार्मोन सीधे तौर पर हमारी उम्र और शारीरिक क्षमता को घटाता है।

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पित्त दोष और क्रोध का अंतर्संबंध

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में इंसान के मन और शरीर की स्थितियों को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। इस प्राचीन विज्ञान के अनुसार, गुस्से का सीधा संबंध शरीर के ‘पित्त दोष’ से है। जिन लोगों की प्रकृति पित्त वाली होती है, वे छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी आक्रामक हो जाते हैं।

शरीर में पित्त का असंतुलन अत्यधिक गर्मी, एसिडिटी और लगातार रहने वाले चिड़चिड़ेपन को जन्म देता है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से अधीर महसूस करता है, तो उसका सीधा असर उसकी कार्यक्षमता पर पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति को ठंडी और संतुलित जीवनशैली का पालन करना चाहिए।

सांस और आहार से त्वरित नियंत्रण

गुस्से को शांत करने का सबसे त्वरित और प्रभावी तरीका अपनी सांसों पर तुरंत नियंत्रण पाना है। क्रोध आने पर गहरी और धीमी गति से सांस लेने से मस्तिष्क को शांति मिलती है और बढ़ी हुई हृदय गति सामान्य हो जाती है। आयुर्वेद और योग दोनों ही इस श्वास प्रक्रिया को मानसिक स्थिरता का मूल मानते हैं।

इसके अलावा, आहार में तीखे, मसालेदार और अत्यधिक तले-भुने भोजन का त्याग करना चाहिए क्योंकि यह पित्त को और भड़काता है। पित्त को शांत करने के लिए खीरा, नारियल पानी, हरी सब्जियां और मौसमी फलों का सेवन अत्यधिक लाभदायक होता है। शरीर का तापमान संतुलित रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।

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संतुलित दिनचर्या और भावनाओं का प्रबंधन

गुस्से पर स्थायी नियंत्रण के लिए व्यक्ति को नियमित रूप से ध्यान और योग का अभ्यास करना चाहिए। सही समय पर सोना, पर्याप्त नींद लेना और हल्का व्यायाम मन को स्थिर रखने में बड़े सहायक होते हैं। एक संतुलित दिनचर्या व्यक्ति की नकारात्मक सोच को सकारात्मक ऊर्जा में बदल देती है।

आयुर्वेद यह भी स्पष्ट करता है कि व्यक्ति को अपनी भावनाओं को पूरी तरह दबाना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे मानसिक घुटन होती है। इसके बजाय, प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ सेकंड रुकना और अपनी बात को शांत व स्पष्ट स्वर में रखना अधिक फायदेमंद साबित होता है।

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह न समझें। किसी भी फिटनेस प्रोग्राम को शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें। डाइट में बदलाव करने से पहले भी अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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