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Jitiya Vrat Katha: जितिया व्रत कथा बच्चों की लंबी उम्र का रहस्य, पढ़ें रोचक कहानी!

On: सितम्बर 14, 2025 8:06 पूर्वाह्न
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Jitiya Vrat Katha: जितिया व्रत कथा बच्चों की लंबी उम्र का रहस्य, पढ़ें रोचक कहानी!
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Jitiya Vrat Katha: Jitiya Vrat Katha is the secret of long life of children, read the interesting story!: नई दिल्ली: जितिया व्रत की कथा बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए माताओं के बीच खास महत्व रखती है।

यह कथा न केवल श्रद्धा को बढ़ाती है, बल्कि आयुर्वेद और आस्था का अनूठा संगम भी पेश करती है। आइए, इस पवित्र जितिया व्रत की कथा को सरल शब्दों में जानते हैं, जो सूतजी ने नैमिषारण्य के ऋषियों को सुनाई थी।

जितिया व्रत की शुरुआत Jitiya Vrat Katha

सूतजी ने बताया कि जब द्वापर युग का अंत और कलियुग की शुरुआत हुई, तब कई शोकाकुल महिलाएं गौतमजी के पास गईं। उन्होंने पूछा, “इस कलियुग में बच्चों को लंबी उम्र कैसे मिले?” गौतमजी ने जवाब में एक प्राचीन कथा सुनाई।

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महाभारत युद्ध के बाद, जब द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों को मार दिया, तब दुखी द्रौपदी ने ब्राह्मण धौम्य से पूछा, “बच्चों की लंबी उम्र के लिए क्या करें?” धौम्य ने जितिया व्रत की कथा सुनाई।

जीमूतवाहन की दयालुता

धौम्य ने बताया कि सत्ययुग में जीमूतवाहन नामक एक दयालु राजा थे। एक बार अपनी ससुराल में रहते हुए, उन्होंने एक बूढ़ी मां को अपने मृत बेटे के लिए रोते देखा। मां ने बताया कि गरुड़ रोज बच्चों को खा जाता है। यह सुनकर जीमूतवाहन ने उस मां का दुख दूर करने का फैसला किया।

वे उस जगह पहुंचे जहां गरुड़ मांस खाता था। जब गरुड़ ने राजा का बायां अंग खाया, तो राजा ने निस्वार्थ भाव से अपना दायां अंग भी दे दिया। गरुड़ ने उनकी दयालुता देखकर पूछा, “आप कौन हैं?” राजा ने कहा, “मैं सूर्यवंश का जीमूतवाहन हूं।” उनकी निस्वार्थता से प्रभावित होकर गरुड़ ने वरदान दिया कि जिन बच्चों को उन्होंने खाया, वे जीवित हो जाएंगे और भविष्य में कोई बच्चा नहीं मरेगा।

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जितिया व्रत का महत्व

गरुड़ ने अमृत लाकर मृत बच्चों की हड्डियों पर बरसाया, जिससे वे जीवित हो गए। गरुड़ ने कहा, “आज आश्विन कृष्ण सप्तमी रहित अष्टमी है। इस दिन से जीवित्पुत्रिका व्रत शुरू होगा।

जो महिलाएं शुद्ध अष्टमी को यह व्रत करेंगी और कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाकर पूजा करेंगी, उनके बच्चों की उम्र लंबी होगी।” व्रत का पारण नवमी को करना चाहिए, वरना फल नष्ट हो सकता है। द्रौपदी ने यह व्रत किया और उनके बच्चों को लंबी उम्र मिली।

चील और सियारिन की कहानी

गौतमजी ने आगे बताया कि एक चील और सियारिन ने यह कथा सुनी और व्रत किया। चील ने पूरे नियमों का पालन किया, लेकिन सियारिन ने आधी कथा सुनकर मांस खा लिया। अगले जन्म में दोनों अयोध्या के एक व्यापारी के घर बहनें बनीं।

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सियारिन (बड़ी बहन) काशिराज की पत्नी बनी, और चील (छोटी बहन) मंत्री की पत्नी। सियारिन के बच्चे मर जाते थे, जबकि चील के आठ बेटे जीवित रहे। ईर्ष्या में राजरानी ने मंत्री के बेटों को मारने की कोशिश की, लेकिन व्रत के पुण्य से वे बच गए। अंत में, चील ने राजरानी को जितिया व्रत के नियमों का पालन करने की सलाह दी। राजरानी ने व्रत किया और उसके बच्चे भी दीर्घायु हुए। सूतजी कहते हैं, यह व्रत करने से बच्चों को लंबी उम्र और सुख मिलता है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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