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Nadi Ghaat Par Shayari: इन 15 लाजवाब शेरों से जीतें अपनों का दिल!

On: October 26, 2025 6:52 AM
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Nadi Ghaat Par Shayari: इन 15 लाजवाब शेरों से जीतें अपनों का दिल!
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Nadi Ghaat Par Shayari in hindi: नई दिल्ली | नदी के किनारे बने घाट भारतीय संस्कृति और जीवन का एक खास हिस्सा हैं। ये सिर्फ पानी की धारा को नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, सपनों और भावनाओं को भी अपने साथ बहाते हैं। घाट वो जगह हैं, जहां जिंदगी के छोटे-बड़े पल एक साथ सांस लेते हैं।

जन्म के संस्कार से लेकर अंतिम विदाई तक, घाट हर कहानी का साक्षी बनते हैं। नदियां बदलती हैं, पानी बह जाता है, लेकिन घाट हमारी यादों और परंपराओं को हमेशा जिंदा रखते हैं। इन खास घाटों ने कई मशहूर शायरों को प्रेरित किया है, जिन्होंने अपनी शायरी में घाटों की खूबसूरती को बखूबी बयां किया है। आइए, पढ़ते हैं घाट पर लिखी गई कुछ शानदार शायरी।

घाटों की शायरी का जादू Nadi Ghaat Par Shayari

शायरों ने घाटों को अपनी शायरी का हिस्सा बनाकर उन्हें अमर कर दिया। जैसे क़मर जमील ने लिखा, “या इलाहाबाद में रहिए जहां संगम भी हो, या बनारस में जहां हर घाट पर सैलाब है।” वहीं, अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद ने मजेदार अंदाज में कहा, “मग़रिब मुझे खींचे है तो रोके मुझे मशरिक़, धोबी का वो कुत्ता हूँ कि जो घाट न घर का।

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” आरज़ू लखनवी की शायरी में गहरी बात है, “धारे से कभी कश्ती न हटी और सीधी घाट पर आ पहुँची, सब बहते हुए दरियाओं के क्या दो ही किनारे होते हैं।” असद अली ख़ान क़लक़ ने लिखा, “घाट पर तलवार के नहलाईयो मय्यत मिरी, कुश्ता-ए-अबरू हूँ मैं क्या ग़ुस्ल-ख़ाना चाहिए।” नातिक़ गुलावठी ने कहा, “कश्ती है घाट पर तू चले क्यूं न दूर आज, कल बस चले चले न चले चल उठा तो ला।” ये शेर दिल को छू लेते हैं।

प्यार और जिंदगी की बातें

घाटों की शायरी में प्यार और जिंदगी की गहराई भी झलकती है। अंजुम मानपुरी ने लिखा, “ये दो-दिली में रहा घर न घाट का ‘अंजुम’, बुतों को कर न सका ख़ुश ख़ुदा को पा न सका।” लुत्फ़ुन्निसा इम्तियाज़ ने इश्क को बयां करते हुए कहा, “इश्क़ के घाट पर सँभल कर चढ़, क्यों कि उस का चढ़ाओ मुश्किल है।

” ज़िया मज़कूर ने लिखा, “ये मोहब्बत वो घाट है जिस पर, दाग़ लगते हैं कपड़े धोने से।” गुलज़ार की शायरी में जिंदगी की सच्चाई है, “लोग कंधे बदल बदल के चले, घाट पहुंचे बड़े वसीलों से।” फौज़िया मुग़ल ने खूबसूरती से कहा, “सारी नफ़रतें बह जाएं, गंगा घाट पर अगर मन भी नहलाएं।”

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बनारस और घाटों का रोमांस

बनारस के घाटों की बात हो और शायरी अधूरी रहे, ऐसा कैसे हो सकता है? दुष्यंत कुमार ने लिखा, “हो गई हर घाट पर पूरी व्यवस्था, शौक़ से डूबे जिसे भी डूबना है।” नज़ीर बनारसी ने कहा, “वाह रे अपनी सुब्ह-ए-बनारस, घाट के पत्थर जैसे पारस।” अख़्तर शीरानी ने लिखा, “हर इक को भाती है दिल से फ़ज़ा बनारस की, वो घाट और वो ठंडी हवा बनारस की।

” परवीन शाकिर की शायरी में रोमांस है, “लौट आई हो वो शब जिस के गुज़र जाने पर, घाट से पायलें बजने की सदा आई हो।” और जोश मलीहाबादी ने जादू बयां किया, “ले के अंगड़ाई जो तू घाट पे बदले पहलू, चलता फिरता नज़र आ जाए नदी पर जादू।” ये शायरी आपके दिल को जरूर छूएगी। अगर आप किसी खास को इम्प्रेस करना चाहते हैं, तो इनमें से कोई शेर भेजकर उनका दिल जीत सकते हैं।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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