Navratri Diet Health Benefits: नवरात्रि का पर्व भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। साल में दो बार आने वाली नवरात्रि में चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र का खास महत्व है। शारदीय नवरात्र सितंबर-अक्टूबर में आते हैं, जब भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास करते हैं।
इस दौरान खान-पान में कई सावधानियां बरती जाती हैं, जिनमें से एक है लहसुन और प्याज का सेवन न करना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि में लहसुन-प्याज क्यों नहीं खाया जाता और इसका आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है? आइए, जानते हैं इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक कारण।
नवरात्रि में लहसुन-प्याज क्यों नहीं खाते?
धार्मिक कारण
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, लहसुन और प्याज को तामसिक आहार माना जाता है। तामसिक भोजन मन में आलस्य, क्रोध और कामवासना को बढ़ा सकता है। नवरात्रि में भक्तों का ध्यान शुद्धता और भक्ति पर होता है, इसलिए लहसुन और प्याज खाने की मनाही होती है। सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है ताकि मन शांत और पवित्र रहे।
आयुर्वेद का मत
आयुर्वेद में लहसुन और प्याज को सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है, लेकिन इनकी तासीर हल्की गर्म होती है। यह मन को उत्तेजित कर सकती है, जबकि व्रत के दौरान मन का शांत और स्थिर रहना जरूरी है। इसलिए नवरात्रि में इनका सेवन नहीं किया जाता, ताकि शरीर और मन में संतुलन बना रहे।
लहसुन-प्याज न खाने से सेहत पर असर
लहसुन और प्याज का स्वाद तीखा होता है, जो पाचन तंत्र पर दबाव डाल सकता है। नवरात्रि में इनका सेवन न करने से पाचन तंत्र बेहतर काम करता है।
सात्विक भोजन से कैलोरी इंटेक कम होता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, कुछ दिन लहसुन-प्याज न खाने से सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, बशर्ते आप डाइट में हेल्दी विकल्प जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। सात्विक भोजन नवरात्रि में आपकी सेहत को निखारता है और शरीर को हल्का और ऊर्जावान रखता है।












