कुरुक्षेत्र (Kurukshetra Diabetes Cases): मधुमेह एक ऐसी बीमारी है, जिस पर नियमित जांच, सही दवा और स्वस्थ जीवनशैली से पूरी तरह नियंत्रण किया जा सकता है। यह एक लाइफस्टाइल-बेस्ड, शारीरिक अव्यवस्था है, जिसे पूर्ण रूप से मिटाया नहीं जा सकता। मधुमेह को लेकर लोग सतर्कता भी बरत रहे हैं तथा मधुमेह की पहचान होने पर लोग दिनचर्या में बदलाव कर स्वस्थ हो रहे हैं।
छह माह में जिले भर में 18881 लोगों में मधुमेह पाया गया। लोगों में जागरूकता के कारण ही यह आंकड़ा बड़ा है। लोग मधुमेह को गंभीरता से लेने लगे हैं। जांच के बाद ही मधुमेह का खुलासा हो रहा है। पहले लोग जांच नहीं कराते थे, जिसका परिणाम ये था कि तीसरी चौथी स्टेज में जाकर पता चलता था कि वह मधुमेह की चपेट में हैं, लेकिन तब तक शरीर काफी कमजोर हो जाता था।
13 वर्षीय जोया दिन में ले रही तीन बार इंसुलिन
ज्योतिसर वासी 13 वर्षीय जोया इन दिनों मधुमेह से पीड़ित हैं। जोया की शुगर 435 से 500 तक चल रही है। उन्हें दिन में तीन बार इंसुलिन लगवानी पड़ती है।
2022 में छोड़ दिया था अन्न
कौल वासी जगदीश ने बताया कि वह बचपन से ही स्वास्थ्य को लेकर गंभीर हैं। साल 2022 में उन्होंने अन्न त्याग दिया तभी से वह फलाहार पर हैं। जगदीश ने बताया कि इन दिनों खाने पीने की वस्तुओं में मिलावट खोरी का धंधा खूब पनप रहा है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। वहीं स्याना सैयदा गांव के 65 वर्षीय श्रवण कुमार ने तीन माह में दिनचर्या में बदलाव कर शुगर को कंट्रोल किया है। 200 से 235 तक शुगर चल रही थी। अब उनकी शुगर 108 तक पहुंच गई है।
महिलाएं आ रही ज्यादा चपेट में
एनसीडी कॉर्नर रूम के काउंसलर मलकीत सिंह, अंजू बाला, जसपाल ने बताया कि सबसे ज्यादा बीपी, शुगर की शिकार महिलाएं हो रही हैं। आंकड़ों में देखने में आया है कि महिलाओं में सबसे ज्यादा ये बीमारी पाई जा रही हैं। नर्सिंग ऑफिसर अंजू बाला ने बताया कि छह माह में 879 पुरुष व 1110 महिलाओं में बीपी, शुगर पाया गया।
यह जानना जरूरी
खाली पेट शुगर : 80 -130 मिलीग्राम प्रति डेसिलीटर।
खाने के 2 घंटे बाद : 140-180 मिलीग्राम प्रति डेसीलिटर एलडीएल ( खराब कोलेस्ट्रॉल ) : 100 से कम।
उच्च रक्तचाप : 130/80 से कम।
विशेषज्ञ इसके लिए बिगड़ी दिनचर्या व भाग दौड़ भरे लाइफ स्टाइल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जिले में मधुमेह के मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। उम्रदराज ही नहीं बच्चे 12 से 13 साल के बच्चे भी मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में 55608 का इलाज चल रहा है।













