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Phool Walon Ki Sair Delhi: हिंदू-मुस्लिम एकता का जश्न, मिस मत करना! ‘फूल वालों की सैर’

On: November 4, 2025 9:03 AM
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Phool Walon Ki Sair Delhi: हिंदू-मुस्लिम एकता का जश्न, मिस मत करना! 'फूल वालों की सैर'
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Phool Walon Ki Sair Delhi:  दिल्ली की हवा में एक खास बात है — यहां की गलियां इतिहास, परंपरा और विविधता से महकती हैं। इन्हीं सुगंधों में सबसे खास खुशबू है ‘फूल वालों की सैर’ नाम के उत्सव की। यह न सिर्फ खिलते-महकते फूलों का उत्सव है, बल्कि दिल्ली की गंगा-जमुनी तहजीब का जश्न भी है।

यह त्योहार हर साल महरौली में धूम-धाम से मनाया जाता है और इसमें हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदाय मिलकर भाग लेते हैं। जानें फूल वालों की सैर 2025 की तारीख, इतिहास, स्थान और आकर्षण। दिल्ली के इस फूलों के त्योहार की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

फूल वालों की सैर 2025 डेट Phool Walon Ki Sair Delhi

जानकारी के अनुसार, इस वर्ष फूल वालों की सैर 2025 का आयोजन 2 नवंबर से 8 नवंबर 2025 के बीच होगा। यह हर साल दिल्ली के महरौली में आयोजित किया जाता है। इसके दो मुख्य स्थल हैं – योगमाया मंदिर और ख्वाजा बख्तियार काकी की दरगाह। इस आयोजन को अंजुमन सैर-ए-गुल फरोशां नाम की संस्था 1962 से लगातार कराती आ रही है।

एक मन्नत से शुरू हुई सैकड़ों साल पुरानी परंपरा

फूल वालों की सैर का इतिहास करीब दो शताब्दियों पुराना है और यह मुगलकाल से जुड़ा है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत मुगल बादशाह अकबर शाह द्वितीय के शासनकाल (1808–1837) के दौरान हुई थी, जब उनकी पत्नी कुदसिया बेगम ने अपने बेटे मिर्जा जहांगीर की सलामती की मन्नत मांगी थी। जब मन्नत पूरी हुई, तो उन्होंने महरौली जाकर दरगाह में फूलों की चादर और फूलों से बना पंखा चढ़ाया। अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने पास ही स्थित योगमाया मंदिर में भी फूल चढ़ाए थे।

तभी से यह आयोजन सद्भाव, एकता और प्रेम का प्रतीक बन गया। हालांकि बताया जाता है कि ब्रिटिश शासन के दौरान यह कुछ समय बंद हो गया था, लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रयासों से 1961 में इसे वापस शुरू किया गया। इस तरह रंग, खुशबू और एकता का उत्सव दिल्ली की पहचान से भी जुड़ गया।

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फूल वालों की सैर में क्या-क्या होता है

फूल वालों की सैर केवल फूलों का त्योहार नहीं, बल्कि दिल्ली की आत्मा का उत्सव भी कहा जा सकता है। इसमें कई तरह के कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं जो आपको उल्लास और उमंग से भर देंगे।

फूलों का जुलूस महरौली में योगमाया मंदिर से दरगाह तक सुंदर फूलों से सजा जुलूस निकलता है। इस जुलूस में ढोल-नगाड़े, नाचते कलाकार, कव्वाल और स्थानीय लोग शामिल होते हैं।

दोनों धार्मिक स्थलों – यानी कि मंदिर और दरगाह पर फूलों की चादरें और पंखे अर्पित किए जाते हैं। यह दृश्य आपसी सम्मान और सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश करता है।

शाम को कव्वाली, लोक नृत्य, कथक और सूफी संगीत की प्रस्तुतियां होती हैं। इस दौरान दिल्ली के स्कूलों और एनजीओ के बच्चे भी यहां अपनी प्रस्तुतियां देते हैं।

आसपास की गलियों में अस्थायी बाजार लगते हैं, जहां दिल्ली की पुरानी खुशबू, खाने-पीने के ठेले और रंगीन झूमर-लैंप आपको पुराने जमाने में ले जाते हैं।

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क्यों देखें फूल वालों की सैर

दिल्ली की असली पहचान – यहां धर्म नहीं, संस्कृति की खुशबू मिलती है। इतिहास से मुलाकात – मुगल काल की झलक आज भी जीवित है। रंगों की दुनिया – फूल, झांकियां और संगीत से सजी दिल्ली की शामें। फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट – सोशल मीडिया कंटेंट के लिए बेहतरीन जगह। साम्प्रदायिक सौहार्द का पाठ – आज के समय में सबसे जरूरी सीख।

फूल वालों की सैर में शानदार फोटोग्राफी कैसे करें

फूल वालों की सैर फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है। यहां की रोशनी, रंग और चेहरों के भाव अनगिनत कहानियां कह जाते हैं। यहां जो सदियों का संगम नजर आता है, उसे कैमरे में कैद करना वाकई अद्भुत अनुभव है। हालांकि शानदार तस्वीरें लेने में ये टिप्स आपकी मदद करेंगे।

सुबह का समय चुनें: जुलूस की शुरुआत में प्राकृतिक रोशनी होती है — यह पोर्ट्रेट और वाइड शॉट्स के लिए आदर्श है। रंगों पर ध्यान दें: फूलों की सजावट, पारंपरिक पोशाकें और मंदिर-दरगाह की झलक को फ्रेम में लाएँ। सौहार्द के पल: हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोग जब एक साथ पूजा या सलाम करते हैं — वही इस उत्सव की असली आत्मा है।

लो-एंगल शॉट लें: मंदिर या दरगाह की पृष्ठभूमि में फूलों की झांकी का लो-एंगल फ्रेम बहुत आकर्षक लगता है। नाइट शॉट्स: शाम को दीयों और रोशनियों से सजी गलियां देखने लायक होती हैं। इनको कैमरे में कैद करने के लिए बेहतर होगा कि ट्राइपॉड साथ रखें।

फूल वालों की सैर में मिलेगा दिल्ली का देसी स्वाद

फूल वालों की सैर में सिर्फ फूलों की नहीं, स्वाद की भी खुशबू फैली होती है। महरौली की गलियों और दरगाह के पास कई लोकप्रिय व्यंजन मिलते हैं। आप इन तमाम चीजों का जायका यहां ले सकते हैं। निहारी और बिरयानी: पुरानी दिल्ली की झलक लिए देसी स्वाद।

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कुल्फी, रबड़ी, जलेबी: मीठे शौकीनों के लिए परफेक्ट। चाट और गोलगप्पे: योगमाया मंदिर के आस-पास के ठेलों पर ज़रूर चखें। शाकाहारी विकल्प: छोले-कुल्चे, आलू-टिक्की और मूंग-दाल-हलवा जैसे व्यंजन हर जगह मिल जाते हैं।

फूल वालों की सैर तक कैसे पहुंचे

फूल वालों की सैर उत्सव का आयोजन महरौली में होता है जो कि दक्षिणी दिल्ली में स्थित है और यहां पहुंचने के कई आसान विकल्प हैं। मेट्रो से सबसे नजदीकी स्टेशन Qutub Minar Metro Station है जो कि वायलेट लाइन पर है। यहां से ऑटो या रिक्शा लेकर योगमाया मंदिर या दरगाह तक जाएं।

इसमें लगभग 5-7 मिनट लगेंगे। बस से DTC बसें कुतुब मीनार या Mehrauli बस स्टॉप तक उपलब्ध हैं। निजी वाहन से पार्किंग सीमित होती है, इसलिए सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर है। रास्ते में भीड़ होती है, इसलिए कैब/ऑटो अधिक सुविधाजनक विकल्प हैं।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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