Radha Ashtami Kab Hae: 30 or 31 August, when to celebrate Radha Rani’s birthday? Know the right way to worship: ज्योतिष | हिंदू धर्म में राधा अष्टमी का खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को यह पवित्र दिन आता है।
इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद पाते हैं। आइए, हम आपको बताते हैं कि इस बार राधा अष्टमी कब है और पूजा का सही तरीका क्या है, जिससे आपका जीवन खुशहाल बन सके।
राधा रानी का जन्मोत्सव कब?
राधा अष्टमी के दिन देशभर में मंदिरों में खास आयोजन होते हैं। भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और व्रत रखकर राधा रानी को प्रसन्न करते हैं।
इस बार राधा रानी के जन्मोत्सव को लेकर लोगों में थोड़ा असमंजस है। तो, हम स्पष्ट कर दें कि अष्टमी तिथि 30 अगस्त 2025 की रात 10:46 बजे से शुरू होगी और 1 सितंबर की मध्यरात्रि को खत्म होगी। उदयातिथि के हिसाब से, 31 अगस्त 2025 को राधा रानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
क्यों खास है राधा अष्टमी?
हिंदू धर्म में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। यह दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद आता है। मान्यता है कि अगर भक्त इस दिन पूरे मन और श्रद्धा से राधा रानी की पूजा करते हैं, तो उन्हें हर काम में सफलता मिलती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी मनोकामनाएं पूरी हों, तो इस दिन व्रत और पूजा जरूर करें।
विधि-विधान से पूजा करने से राधा रानी का आशीर्वाद मिलता है, जो जीवन को सुख और समृद्धि से भर देता है। इस बार 31 अगस्त को राधा रानी का जन्मोत्सव भव्य तरीके से मनाया जाएगा।
पूजा का सही तरीका
राधा अष्टमी के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें। फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। राधा रानी के मंत्रों का जाप करें और भजन-कीर्तन के साथ उनकी आराधना करें। अगर संभव हो तो व्रत रखें और दिनभर राधा-कृष्ण के भक्ति भाव में डूबे रहें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषियों, पंचांग, प्रवचन, मान्यताओं और धर्मग्रंथों पर आधारित है। Haryana न्यूज़ पोस्ट इसकी पुष्टि नहीं करता।












