Ravi Pradosh vrat Katha in Hindi 8 June 2025: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र उपवास है, जो हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। जब यह व्रत रविवार को पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष व्रत कहते हैं, जिसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
यह पर्व न केवल भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि जीवन में यश, स्वास्थ्य, और समृद्धि की कामना को भी पूरा करता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा से विशेष फल प्राप्त होता है। आइए, 8 जून 2025 को पड़ने वाले रवि प्रदोष व्रत की कथा और इसके महत्व को विस्तार से जानते हैं।
कई साल पहले एक छोटे से गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण की पत्नी अत्यंत धार्मिक थी और हर त्रयोदशी को प्रदोष व्रत करती थी। उनका एकमात्र बेटा, जो बड़ा ही भोला और नेकदिल था, एक दिन गंगा स्नान के लिए निकला।
रास्ते में कुछ डाकुओं ने उसे पकड़ लिया और धन की मांग की। मासूम बालक ने सच्चाई से कहा कि उनके पास कोई धन नहीं है, केवल माँ द्वारा दी गई रोटियों की पोटली है। उसकी सादगी और गरीबी देखकर डाकुओं का मन पिघल गया, और वे उसे छोड़कर चले गए।
लेकिन किस्मत ने उस बालक के साथ फिर मजाक किया। एक बरगद के पेड़ के नीचे विश्राम करते समय सिपाहियों ने उसे चोर समझकर पकड़ लिया और राजा के सामने पेश किया। बिना किसी सबूत के उसे जेल में डाल दिया गया। इधर, माँ अपने बेटे की चिंता में डूबी थी।
अगले दिन रवि प्रदोष व्रत था, और उसने पूरे विधान के साथ भगवान शिव की पूजा की, अपने बेटे की सलामती की प्रार्थना करते हुए। उस रात भगवान शिव ने राजा को सपने में दर्शन दिए और कहा कि बालक निर्दोष है, उसे तुरंत रिहा करो, वरना राज्य को भारी नुकसान होगा।
सुबह राजा ने बालक को आजाद कर दिया। बालक ने अपनी कहानी सुनाई, जिससे राजा बहुत प्रभावित हुआ। उसने ब्राह्मण दंपति को बुलाकर सम्मानित किया और उन्हें पांच गांव दान में दिए। इस तरह, भगवान शिव की कृपा से उनका जीवन खुशहाल हो गया।
रवि प्रदोष व्रत की यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और नेक मन से की गई पूजा हर संकट से मुक्ति दिलाती है। 8 जून 2025 को यह व्रत मनाकर आप भी भगवान शिव और सूर्यदेव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन स्नान, पूजा, और दान के साथ व्रत करें, और अपने परिवार के लिए सुख-शांति की प्रार्थना करें।













