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श्राद्ध 2025: 7 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, पूर्वजों को मिलेगा मोक्ष!

On: September 6, 2025 3:29 PM
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Shradh 2025: Pitru Paksha will start from September 7, ancestors will get salvation: श्राद्ध 2025: 7 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, पूर्वजों को मिलेगा मोक्ष
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श्राद्ध 2025, भिवानी : हिंदू धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व है। यह वह समय है जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं। इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा। 21 सितंबर को सर्वपितृ श्राद्ध और देवपितृ कार्य अमावस्या मनाई जाएगी। भिवानी के ज्योतिर्विद पं. कृष्ण कुमार शर्मा नावां ने बताया कि पितृपक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलता है। इस दौरान अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता दिखाने का मौका मिलता है। मान्यता है कि इस समय पूर्वज मोक्ष की कामना के लिए अपने परिजनों के पास विभिन्न रूपों में आते हैं।

श्राद्ध से मिलता है मोक्ष

पं. नावां ने बताया कि हर महीने की अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है, लेकिन भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक का पूरा पखवाड़ा श्राद्ध के लिए विशेष होता है। इस दौरान श्राद्ध करने से पितृलोक में भटक रही आत्माओं को मोक्ष मिलता है। विष्णु पुराण के अनुसार, श्राद्ध से तृप्त होकर पितृ सभी कामनाओं को पूरा करते हैं। इस बार यह पवित्र पखवाड़ा 7 सितंबर से शुरू होगा और 21 सितंबर को खत्म होगा।

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पितरों का पसंदीदा भोजन

पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए उनका पसंदीदा भोजन बनाना शुभ माना जाता है। आमतौर पर कद्दू की सब्जी, दाल-भात, खीर और पूरी बनाई जाती है। पूजा के बाद यह भोजन एक थाली में सजाकर कौवे, कुत्ते, चीटियों और गाय को देना जरूरी है। मान्यता है कि कौवा पितरों का प्रतिनिधि होता है और जब वह भोजन ग्रहण करता है, तभी पितरों को भोजन मिलता है।

महत्वपूर्ण श्राद्ध तिथियां

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पं. नावां ने बताया कि 7 सितंबर को भाद्रपद शुक्ला पूर्णिमा का श्राद्ध होगा। 8 सितंबर को प्रतिपदा, 9 सितंबर को द्वितीया, 10 सितंबर को तृतीया, 11 सितंबर को चतुर्थी (दोपहर 12:46 बजे से पहले) और पंचमी (12:46 बजे बाद), 12 सितंबर को षष्ठी (सुबह 9:59 बजे बाद), 13 सितंबर को सप्तमी (सुबह 7:23 बजे बाद), 14 सितंबर को अष्टमी, 15 सितंबर को नवमी, 16 सितंबर को दशमी, 17 सितंबर को एकादशी, 18 सितंबर को द्वादशी, 19 सितंबर को त्रयोदशी, 20 सितंबर को चतुर्दशी और 21 सितंबर को अमावस्या का श्राद्ध होगा। 21 सितंबर को सर्वपितृ श्राद्ध और देवपितृ कार्य अमावस्या मनाई जाएगी।

पितृपक्ष में इन बातों का रखें ध्यान

पितृपक्ष में अपशब्द बोलना और क्रोध करना अशुभ माना जाता है। इस दौरान लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। पीपल के पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाकर गंगाजल, दूध, घी, अक्षत और पुष्प चढ़ाने से पितरों को शांति मिलती है। अगर श्राद्ध न किया जाए, तो पितर निराश होकर लौट जाते हैं। इसलिए, इस पवित्र अवधि में अपने पूर्वजों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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