हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। (Thyroid Cancer Symptoms) : भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक बेहद चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। देश में सिर, गर्दन और थायरॉयड कैंसर के मामलों में भारी उछाल आया है। यह समस्या अब केवल बुजुर्ग आबादी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देश की युवा जनसंख्या भी तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रही है।
हाल ही में सामने आए चिकित्सा आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है, जिनके मुताबिक 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में इन कैंसरों की पहचान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। डॉक्टर इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रहे हैं और इसके पीछे बदलती जीवनशैली को प्रमुख वजह बता रहे हैं।
डॉ. सुरेंद्र कुमार डाबास की सख्त चेतावनी
प्रख्यात ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुरेंद्र कुमार डाबास का कहना है कि भारत में सिर और गर्दन के कैंसर का बोझ वर्तमान में विश्व में सबसे अधिक है। उन्होंने बताया कि पहले इन बीमारियों को केवल बढ़ती उम्र से संबंधित जोखिमों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि हमारी युवा पीढ़ी भी इससे अछूती नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हानिकारक आदतों की जल्दी शुरुआत और लंबे समय तक जोखिम वाले कारकों के संपर्क में रहने के कारण युवाओं में यह बीमारी विकराल रूप ले रही है।
शहरीकरण और नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल
विशेषज्ञों के मुताबिक, अनियंत्रित शहरीकरण और अत्यधिक तनावपूर्ण दिनचर्या इस समस्या को बढ़ाने में आग में घी का काम कर रही है। आज के दौर में युवा बहुत कम उम्र में ही धूम्रपान और शराब जैसे नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
बाजार में इन हानिकारक पदार्थों की आसान उपलब्धता और काम के दबाव ने युवाओं को गलत रास्तों पर धकेल दिया है। कैंसर के मामलों में वृद्धि के साथ-साथ, समाज में जागरूकता की भारी कमी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई लोग शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे कैंसर का पता बहुत देर से चलता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
महिलाओं में भी बढ़ रही हैं चुनौतियां
भारत में कैंसर के मामलों की यह बढ़ती संख्या केवल पुरुषों या युवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कैंसरों की पहचान भी अक्सर बहुत देर से होती है, जिसका मुख्य कारण जागरूकता और स्क्रीनिंग सुविधाओं की कमी है। हालांकि सरकार और स्वास्थ्य संगठन एचपीवी वैक्सीनेशन कार्यक्रम और स्क्रीनिंग अभियान चला रहे हैं, लेकिन अभी भी जमीनी स्तर पर बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
स्क्रीनिंग और शिक्षा ही है एकमात्र बचाव
अंत में, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत में सिर, गर्दन और थायरॉयड कैंसर की बढ़ती दरें एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय हैं। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है।
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