Yome Ashura Ki Dua In Hindi ashura ki dua to recite on 10th muharram, dua a ashura muharram, youme ashura ki dua 10 muharram ki dua namaz e ashura ka tarika in hindi: मुहर्रम का दसवां दिन, यानी यौम-ए-आशूरा, हर मुसलमान के लिए एक ऐसा दिन है, जो इतिहास के पन्नों में सच्चाई और बलिदान की मिसाल बनकर दर्ज है। यह वह दिन है जब कर्बला के मैदान में हजरत हुसैन (र.अ.) और उनके साथियों ने हक के लिए अपनी जान कुर्बान की थी। इस दिन मुस्लिम समुदाय मातम, मजलिस, और इबादत में डूबा रहता है।
आशूरा की नमाज और दुआ आपके दिल को सुकून देती हैं और अल्लाह की रहमत को करीब लाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन की नमाज और दुआ का सही तरीका क्या है? अगर नहीं, तो फिक्र न करें! हम आपके लिए लाए हैं 10 मुहर्रम की नमाज और दुआ की पूरी जानकारी, जो आपकी इबादत को और आसान बनाएगी। आइए, इस पवित्र दिन की फजीलत को समझें और सही तरीके से इबादत करें।
Yome Ashura Ki Dua In Hindi: यौम-ए-आशूरा
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है, और इसका दसवां दिन, यानी आशूरा, बेहद खास माना जाता है। यह दिन 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में हजरत हुसैन (र.अ.) की शहादत की याद दिलाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई दुआएं अल्लाह के दरबार में खास जगह रखती हैं। यह दिन खुशी का नहीं, बल्कि गम और इबादत का है। मुस्लिम समुदाय इस दिन मातम करता है और कर्बला के शहीदों को याद करता है। आशूरा की नमाज और दुआ न सिर्फ गुनाहों की माफी मांगने का जरिया हैं, बल्कि अल्लाह की रहमत और सलामती की दुआ के लिए भी हैं।
आशूरा की नमाज का सही और आसान तरीका
आशूरा की नमाज एक नफ्ल इबादत है, जिसे अल्लाह की रजा के लिए अदा किया जाता है। इसे दो रकात में पढ़ा जाता है। नमाज शुरू करने से पहले नियत करें: “नियत की मैंने दो रकात नफ्ल नमाज आशूरा की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।” हर रकात में सूरह फातिहा के बाद 10 बार सूरह इखलास (कुल्हुवल्लाहु अहद) पढ़ें। रुकू, सज्दा, और तशह्हुद का क्रम सामान्य नमाज की तरह ही है। नमाज के बाद एक बार आयतुल कुर्सी और नौ बार दुरूदे इब्राहीम पढ़ें। फिर आशूरा की दुआ पढ़ें। यह नमाज सूरज निकलने के बाद से असर की नमाज से पहले तक पढ़ी जा सकती है। सच्चे दिल से नमाज अदा करें, ताकि आपकी इबादत कबूल हो।
आशूरा की दुआ 2025
आशूरा की दुआ इस दिन का सबसे खास हिस्सा है। यह दुआ हजरत हुसैन (र.अ.) और कर्बला के शहीदों की याद में पढ़ी जाती है। दुआ का एक हिस्सा है: “या क़ाबिल तौबति आदम यौम आशूरा, या फारिजा करबी जिन्नूनी यौम आशूरा…” यह दुआ अल्लाह से रहमत, गुनाहों की माफी, और दुनियावी-आखिरती जरूरतों के लिए पढ़ी जाती है। इसे पढ़ने से पहले वुजू करें और शांत जगह पर बैठें।
आशूरा की नमाज का समय सूरज निकलने के बाद से असर की नमाज तक है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नमाज से बचें। इस दिन खान-पान का खास ध्यान रखें और सादा जीवन जिएं। मातम और मजलिस में शामिल होकर कर्बला के शहीदों को याद करें। इस दिन की इबादत में खुलूस और सच्चाई बहुत जरूरी है। सूरह इखलास और दुरूदे इब्राहीम को सही तालमेल के साथ पढ़ें। अगर आप 9 मुहर्रम की रात में भी नमाज अदा करना चाहते हैं, तो मगरिब से ईशा तक का समय चुनें। इस दिन की इबादत आपके दिल को सुकून देगी और अल्लाह की रहमत को करीब लाएगी।
इबादत को बनाएं और खास
आशूरा का दिन सिर्फ नमाज और दुआ का ही नहीं, बल्कि मातम और सदका करने का भी दिन है। इस दिन खाना या मिठाई दान करें, ताकि आपकी इबादत और फजीलत बढ़े। शनि चालीसा का पाठ करें, जैसा कि सुझाया गया है, ताकि आपकी दुआएं कबूल हों। इस दिन अपने दिल को साफ रखें और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए अल्लाह से सलामती मांगें। मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे दिल से आशूरा की दुआ पढ़ता है, वह पूरे साल महफूज रहता है। इस दिन की इबादत को और खास बनाने के लिए मजलिस में शामिल हों और अल्लाह की बारगाह में अपनी हाजतें पेश करें।
आशूरा की नमाज 2025 और 10 मुहर्रम की दुआ यौम-ए-आशूरा का अहम हिस्सा हैं। यह दिन कर्बला की शहादत और हजरत हुसैन (र.अ.) की याद में मातम और इबादत के लिए मनाया जाता है। नफ्ल नमाज में सूरह इखलास और दुरूदे इब्राहीम पढ़कर दुआए आशूरा अदा की जाती है। इस दिन सूरज निकलने से असर तक नमाज पढ़ें और सच्चे दिल से दुआ करें। मातम, मजलिस, और सदका इस दिन की फजीलत को बढ़ाते हैं।













