कुरुक्षेत्र (International Gita Mahotsav)। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र आस्था, इतिहास और संस्कृति का अनोखा संगम है। इसी धरा पर 15 नवंबर से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आगाज होगा तो 21 दिनों तक चारों ओर गीता के श्लोकों की गूंज होगी। पूरा क्षेत्र महोत्सव की आभा से जगमगाने वाला है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर और ब्रह्मसरोवर पर आस्था का दीप जलाने पहुंचते हैं।
गीता महोत्सव के अवसर पर धर्मनगरी का हर कोना रोशनी और भक्ति से भर उठता है। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला अनुभव बन जाता है। अगर आप गीता महोत्सव में पहुंच रहे हैं तो धर्मनगरी में आस्था, इतिहास और संस्कृति का अनोखा संगम देखने के लिए इन स्थलों का भ्रमण अवश्य करें।
महाभारत विषय पर श्रीकृष्ण संग्रहालय
श्रीकृष्ण संग्रहालय, कृष्ण, कुरुक्षेत्र और महाभारत विषय पर केंद्रित अकेला संग्रहालय है जो वर्तमान में तीन भवन खंडों की कुल नौ वीथिकाओं में है। यहां हरियाणा, मथुरा और द्वारका के सामुद्रिक उत्खनन से प्राप्त पुरातात्विक कलाकृतियों का दुर्लभ संग्रह है। संग्रहालय की पुरातात्विक दीर्घा में हरियाणा के विभिन्न आद्य ऐतिहासिक स्थलों से प्राप्त पांच हजार साल पुरानी विरासत है। नौ दीर्घाओं में विस्तरित इस संग्रहालय में देश के विभिन्न भागों से एकत्रित कृष्ण-विष्णु विषय पर मूर्तियों चित्रों पांडुलिपियों और अन्य कला वस्तुओं का एक समृद्ध संग्रह है। पुरातात्विक और मल्टीमीडिया महाभारत एवं गीता गैलरी संग्रहालय के प्रमुख आकर्षण हैं।
संग्रहालय में प्रदर्शित कृतियों में श्रीकृष्ण को एक उपास्य देव, विष्णु के अवतार, एक महान दार्शनिक, महाकाव्य के महानायक, एक कुशल राजनीतिज्ञ एवं प्रेमी के रूप में चित्रित किया गया है। संग्रहालय प्रभारी बलवान सिंह बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के विचारों एवं आदर्शों से लोगों को नैतिक एवं सांस्कृतिक रुप से जाग्रत करने तथा स्थानीय इतिहास से अवगत कराने के उद्देश्य से वर्ष 1987 में भारत रत्न श्री गुलजारीलाल नंदा के अथक प्रयासों से श्रीकृष्ण संग्रहालय की स्थापना की गई थी।
पवित्र ब्रह्म सरोवर
ब्रह्मांड निर्माता ब्रह्मा जी से जुड़े पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर ही अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जा रहा है। ये सरोवर शहर के मध्य में है, जाे 3600 फीट लंबा, 1500 फीट चौड़ा और 45 फीट गहरा है। यहां सांध्यकालीन आरती से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है पर्यटक यहां सूर्यास्त के लाल और सुनहरे प्रतिबिंब को पानी में निहारते हुए घंटों बिता सकते हैं। यहीं पर हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होता है तो सूर्य ग्रहण से लेकर छठ पर्व जैसे अनेक विशेष पर्व भी मनाए जाते हैं।
भद्रकाली मंदिर
देश के प्रसिद्व 52 शक्तिपीठों में से एक देवी कूप मां भद्रकाली मंदिर है। रेलवे स्टेशन से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित इस मंदिर की मान्यता है कि यहां माता सती के घुटने से नीचे का भाग यहां कूप में गिरा था। पांडवों ने भगवान कृष्ण के साथ इस मंदिर में पूजा की थी और यहां अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था। यहां आज भी घोड़े चढ़ाने की परंपरा है।
शेख चिल्ली मकबरा
हरियाणा का ताजमहल कहा जाने वाला शेख चिल्ली का मकबरा धर्मनगरी का खास पर्यटन केंद्र है। करीब 373 साल पुराने इस मकबरे के पश्चिमी भाग में जलालुद्दीन साबरी की दरगाह भी मौजूद है जहां उन्हें उनके मरणोपरांत दफनाया गया था। ऐतिहासिक मकबरा की बनावट व खास सुंदरता देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। बताया जाता है कि यह मकबरा दारा शिकोह ने लगभग 1650 ई. में बनवाया था
धर्मनगरी में ये भी खास
बह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर के साथ ही गीता के 18 अध्यायों पर आधारित 18 मंजिला ज्ञान मंदिर, ज्योतिसर में गुरु-शिक्ष्य श्री कृष्ण-अर्जुन का पहला रथनुमा इस्कॉन मंदिर, भीमा मंदिर सहित कईं बड़े धार्मिक संस्थान निर्माणाधीन है। वहीं गीता ज्ञान संस्थान, श्री वेकेंटश्वर स्वामी तिरूपति बाला जी मंदिर, सर्वेश्वर महादेव मंदिर, स्थाणेश्वर महादेवी मंदिर, दुखभंजन महादेव मंदिर, महादेव मंदिर अरूणाय सहित अनेक प्रख्यात देवालय है।
कुरुक्षेत्र पैनारमा
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की ओर स्थापित कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र रेलवे स्टेशन से लगभग 1.5 किमी दूरी पर श्रीकृष्ण संग्रहालय के बगल में स्थित है।
मूल रूप से यह विज्ञान पर आधारित है, जो वर्ष 2006 से विज्ञान की लौ जलाए हुए हैं। इसमें के विशाल आयोजनों और वैज्ञानिक यात्रा को समाहित किया गया है। यह अपने गुंबद के नीचे भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास और ज्ञान के अद्भुत वैभव को प्रदर्शित करता है। कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र ने मूर्तियों और रोशनी के साथ एक प्रभावशाली चित्रात्मक शृंखला है। कुरुक्षेत्र की महाभारत की भव्य घटना को प्रदर्शित करने के लिए पैनोरमा में एक बेलनाकार हॉल का पूरा स्पेक्ट्रम समर्पित है। कौरवों और पांडवों के इस अठारह दिवसीय युद्ध को 18 फीट ऊंचे चित्रों में दर्शाया गया है।
कल्पना चावला तारामंडल
देश की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री डॉ कल्पना चावला की याद में 6.50 करोड़ की लागत से प्रदेश का एकमात्र यह तारामंडल पांच एकड़ भूमि का क्षेत्र शामिल है। रेलवे स्टेशन से यह करीब पांच किलोमीटर दूरी पर पिहोवा रोड पर स्थित है। इसी रोड पर ही करीब एक किलोमीटर दूरी पर गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर तीर्थ है।












