Maa par kavita poem on mother in Hindi: मां यह छोटा सा शब्द अपने आप में एक अनंत संसार समेटे हुए है। वह जीवन की पहली गुरु, पहला प्यार और हर मुश्किल में ढाल बनने वाली शक्ति है। मां की ममता का कोई मोल नहीं, उसके त्याग की कोई सीमा नहीं। उसकी गोद में छुपा सुकून और उसकी मुस्कान में बसी रोशनी हर बच्चे के लिए अनमोल खजाना है। भारतीय संस्कृति और साहित्य में मां को प्रेम, बलिदान और करुणा का प्रतीक माना गया है। हिंदी साहित्य के महान कवियों ने अपनी कविताओं में मां की इस महिमा को शब्दों में पिरोया है। आइए, मां की ममता को समर्पित कुछ चुनिंदा कविताओं के जरिए उनके अनमोल योगदान को याद करें।
Maa par kavita: मां पर कविता
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता मां मां की गोद में मिलने वाले सुख को बयां करती है। इस कविता में मां के आंचल को वह छांव बताया गया है, जहां जीवन का पहला प्यार मिलता है। कविता की पंक्तियां कहती हैं कि मां के आंसुओं ने हमें हर दुख को हंसकर सहना सिखाया। मां का यह प्यार वह अनमोल रत्न है, जो संसार के किसी बाजार में नहीं मिलता। यह कविता हर उस बच्चे के दिल को छूती है, जो अपनी मां की गोद में सुकून पाता है।
मां, तेरे आंचल की छांव में,
मैंने पाया जीवन का पहला प्यार,
तेरी गोद में जो सुख मिला,
वह न मिला संसार के बाज़ार।
तेरे आंसुओं ने सिखाया मुझे,
हर दुख को हंसकर सहना,
मां, तू ही मेरा संसार है,
तेरे बिना सब कुछ अधूरा।
– सुभद्रा कुमारी चौहान
मां का आलिंगन: पवित्र मंदिर
मैथिलीशरण गुप्त की कविता मां का आलिंगन मां की गोद को एक पवित्र मंदिर की तरह चित्रित करती है। इस कविता में मां की एक मुस्कान को जीवन के हर रंग को संवारने वाली शक्ति बताया गया है। मां का आलिंगन वह जगह है, जहां हर दुख का अंत होता है और जीवन नए उत्साह से भर उठता है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि मां के बिना यह संसार अधूरा और अंधेरा है।
मां का आलिंगन, वो पवित्र मंदिर,
जहां हर दुख का अंत होता है,
उसकी एक मुस्कान से,
जीवन का हर रंग संवरता है।
तेरे आंचल में छुपा है,
सारा जहान का प्यार,
मां, तेरे बिना ये जीवन,
है बस एक अंधा संसार।
–मैथिलीशरण गुप्त
मां की ममता: गहरा सागर
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता मां की ममता को एक गहरे सागर से तुलना करती है। इस कविता में मां के बलिदान और उसकी हंसी के पीछे छुपे दर्द को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है। मां हर कष्ट को हंसकर सहती है, फिर भी उसका चेहरा हमेशा मुस्कुराता रहता है। यह कविता मां को वह दीपक बताती है, जो जीवन के अंधेरे में राह दिखाती है।
मां की ममता, वो सागर गहरा,
जिसमें डूबकर जीवन तट पाता,
हर कष्ट को वो हँसकर सहती,
फिर भी चेहरा उसका मुस्कुराता।
तेरे बलिदान की गाथा,
हर पल मुझे सिखाती है,
मां, तू ही वो दीपक है,
जो अंधेरे में राह दिखाती है।
–सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
तेरे बिना: मां की यादों का दर्द
तेरे बिना शीर्षक वाली कविता मां की अनुपस्थिति के दुख को बयां करती है। इस कविता में बचपन की उन यादों को ताजा किया गया है, जब मां की रोटी की खुशबू और उसके कदमों की आहट घर को जीवंत बनाती थी। मां का साया हर पल बच्चे को थामता है, और उसकी कमी जीवन को सूना कर देती है। यह कविता मां के प्रति गहरी भावनाओं को व्यक्त करने का एक मार्मिक माध्यम है।
मां, तेरे बिना ये आंगन सूना,
तेरी बातों का वो मधुर सपना,
चूल्हे की आग, वो रोटी की खुशबू,
अब कहां वो बचपन का अनुपम मधु।
तेरे कदमों की आहट,
अब भी कानों में गूंजती है,
मां, तू ही वो साया है,
जो हर पल मुझको थामती है।
मां की दुआ: जीवन की शक्ति
कुंवर नारायण की कविता मां की दुआ मां की दुआओं को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताती है। इस कविता में मां के आशीर्वाद को अमृत की बूंदों की तरह चित्रित किया गया है, जो हर मुश्किल में साथ देती हैं। मां की दुआएं वह शक्ति हैं, जिन्होंने हमें हर सपना पूरा करना सिखाया। यह कविता मां के प्रति कृतज्ञता और सम्मान को व्यक्त करती है।
मां की दुआएं, वो अमृत बूंदें,
जो जीवन को हर पल सींचती हैं,
हर कदम पर वो मेरे साथ हैं,
मुझको मुश्किलों से बचाती हैं।
तेरे आशीर्वाद की छांव में,
मैंने हर सपना पाया है,
मां, तू वो शक्ति है,
जिसने मुझे जीना सिखाया है।
– कुंवर नारायण
मां को समर्पित करें ये कविताएं
ये कविताएं मां की ममता, त्याग और प्यार को न केवल श्रद्धांजलि देती हैं, बल्कि हमें उनके महत्व को और गहराई से समझाती हैं। मातृ दिवस 2025 (Mothers Day 2025) पर इन कविताओं को अपनी मां को समर्पित करें। इन्हें इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या फेसबुक पर साझा कर अपनी भावनाओं को व्यक्त करें। मां के प्रति अपनी श्रद्धा और प्यार को इन शब्दों के जरिए दुनिया तक पहुंचाएं।













